थायरॉइड के मरीज भूलकर भी न करें ये गलती! जानिए कौन-सा व्यायाम देगा सबसे ज्यादा फायदा

Thyroid Exercise: थायरॉइड रोग में सही व्यायाम ऊर्जा बढ़ाने, वजन नियंत्रित रखने और मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में मदद कर सकता है। जानिए हाइपोथायरॉइड और हाइपरथायरॉइड मरीजों के लिए कौन-से एक्सरसाइज सुरक्षित और सबसे ज्यादा फायदेमंद माने जाते हैं।
by

Thyroid Exercise Tips: थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं आज तेजी से बढ़ रही हैं और यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर, हृदय गति और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सही तरीके से किया गया व्यायाम थायरॉइड मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

नियमित शारीरिक गतिविधि न केवल ऊर्जा बढ़ाती है बल्कि नींद, मूड और वजन नियंत्रण में भी मदद करती है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि व्यायाम तभी सुरक्षित माना जाता है जब थायरॉइड हार्मोन नियंत्रण में हों और एक्सरसाइज की तीव्रता शरीर की स्थिति के अनुसार तय की जाए।

हाइपरथायरॉइडिज्म क्या है और इसका शरीर पर क्या असर पड़ता है?

हाइपरथायरॉइडिज्म ऐसी स्थिति है जिसमें थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा T3 और T4 हार्मोन बनाने लगती है। इसकी वजह ग्रेव्स डिजीज, टॉक्सिक गोइटर या थायरॉइडाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस स्थिति में शरीर का मेटाबॉलिज्म तेजी से बढ़ जाता है, जिससे तेज धड़कन, वजन घटना, हाथ कांपना, घबराहट, अनिद्रा और हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहने पर ऑस्टियोपोरोसिस और हृदय संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं।

ये भी पढ़ें: अगर आप भी सुबह खाली पेट फल खाते हैं, तो पहले जान लें ये जरूरी चेतावनी!

हाइपोथायरॉइडिज्म में क्यों महसूस होती है ज्यादा थकान?

इसके विपरीत हाइपोथायरॉइडिज्म में थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगते हैं। यह स्थिति अक्सर हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस, आयोडीन की कमी या थायरॉइड सर्जरी के बाद देखने को मिलती है। इस बीमारी में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे लगातार थकान, वजन बढ़ना, कब्ज, सुस्ती, अवसाद और मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक, इस स्थिति में हल्का और नियमित व्यायाम शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है।

थायरॉइड मरीजों के लिए व्यायाम कैसे करता है काम?

थायरॉइड मरीजों के लिए व्यायाम कैसे करता है काम?

विशेषज्ञ बताते हैं कि नियंत्रित हाइपरथायरॉइडिज्म वाले मरीजों में हल्का और मध्यम व्यायाम तनाव कम करने, दिल की कार्यक्षमता सुधारने और चिंता को कम करने में मदद करता है। वहीं हाइपोथायरॉइडिज्म में एक्सरसाइज मेटाबॉलिज्म को सक्रिय करती है और कैलोरी बर्न बढ़ाती है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मांसपेशियों को मजबूत बनाकर शरीर की ऊर्जा खपत को बेहतर करती है। इसके अलावा व्यायाम से एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज होते हैं, जो मानसिक तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करते हैं।

कौन-से व्यायाम थायरॉइड मरीजों के लिए सबसे बेहतर?

डॉक्टरों के अनुसार शुरुआत हमेशा कम प्रभाव वाले व्यायाम से करनी चाहिए। तेज चलना, हल्की साइक्लिंग, योग, ताई-ची, तैराकी और हल्की सीढ़ियां चढ़ना शुरुआती मरीजों के लिए अच्छे विकल्प माने जाते हैं। ये व्यायाम शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय बनाते हैं और चोट या अत्यधिक थकान का खतरा कम करते हैं।

जब शरीर की स्थिति स्थिर हो जाए और डॉक्टर अनुमति दें, तब दौड़ना, रस्सी कूदना, HIIT वर्कआउट या तेज कार्डियो जैसे हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज किए जा सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बिना चिकित्सकीय सलाह के अत्यधिक कठिन वर्कआउट करने से हृदय पर दबाव बढ़ सकता है।

कितनी देर और कितनी तीव्रता से करें व्यायाम?

विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, मध्यम तीव्रता वाले व्यायाम कम से कम 150 मिनट प्रति सप्ताह किए जा सकते हैं। इसे सप्ताह में पांच दिन 30 मिनट के हिसाब से बांटा जा सकता है। वहीं अधिक तीव्र व्यायाम के लिए 75 मिनट प्रति सप्ताह पर्याप्त माने जाते हैं। मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम जैसे डम्बल, रेजिस्टेंस बैंड या बॉडी-वेट ट्रेनिंग सप्ताह में कम से कम दो दिन करनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती दौर में शरीर की क्षमता से ज्यादा मेहनत करना नुकसानदायक हो सकता है।

व्यायाम करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

थायरॉइड मरीजों को व्यायाम शुरू करने से पहले अपने हार्मोन स्तर की जांच जरूर करानी चाहिए। अगर दिल की धड़कन बहुत तेज हो, लगातार कमजोरी महसूस हो रही हो या अचानक वजन कम या ज्यादा हो रहा हो, तो पहले डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। हाइपरथायरॉइडिज्म वाले लोगों को हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट से बचना चाहिए, खासकर तब तक जब तक हार्मोन नियंत्रण में न आ जाएं। वहीं हाइपोथायरॉइडिज्म मरीजों को कम तीव्रता से शुरुआत कर धीरे-धीरे अपनी सहनशक्ति बढ़ानी चाहिए। अगर व्यायाम के दौरान चक्कर आना, सांस फूलना, सीने में दर्द या घबराहट महसूस हो तो तुरंत रुक जाना चाहिए।

ये भी पढ़ें: AC में घंटों बैठना और ज्यादा चाय-कॉफी पीना बन सकता है Kidney Damage और डिहाइड्रेशन का खतरा

नियमित व्यायाम की आदत कैसे बनाएं?

विशेषज्ञों के मुताबिक, थायरॉइड मरीजों में थकान और मूड स्विंग के कारण नियमित व्यायाम जारी रखना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में दोस्तों या परिवार के साथ वर्कआउट करना, पसंदीदा संगीत सुनना या फिटनेस ऐप का इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है। छोटे-छोटे लक्ष्य तय करना और रोजाना पैदल चलने जैसी गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करना भी फायदेमंद माना जाता है। एक्सरसाइज में विविधता बनाए रखने से बोरियत कम होती है और लंबे समय तक फिटनेस रूटीन जारी रखना आसान हो जाता है।

इलाज का विकल्प नहीं है व्यायाम

डॉक्टर स्पष्ट कहते हैं कि व्यायाम थायरॉइड रोग के इलाज का विकल्प नहीं बल्कि एक सहायक उपाय है। दवाओं को बंद करके केवल वर्कआउट पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। सही इलाज, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम का संयोजन ही थायरॉइड मरीजों को बेहतर जीवनशैली और स्वस्थ शरीर प्रदान कर सकता है।

खबर शेयर करें: