सोना-चांदी खरीदना हुआ महंगा: सरकार के फैसले से आम खरीदारों की बढ़ी चिंता

Gold Import Duty: सरकार ने सोने और चांदी की इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है, जिससे आम लोगों के लिए इन्हें खरीदना महंगा हो सकता है। नए फैसले के बाद ज्वेलरी और गोल्ड निवेश महंगा होने की संभावना है।
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Gold Import Duty Hike: देश में सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। केंद्र सरकार ने कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी में बड़ा इजाफा कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, 13 मई 2026 से सोने और चांदी पर बेसिक कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है। सरकार के इस फैसले के बाद सर्राफा बाजार में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में गोल्ड तथा सिल्वर की कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

गोल्ड इंपोर्ट अब पहले से ज्यादा महंगा

नई व्यवस्था के तहत सोने पर कुल इंपोर्ट ड्यूटी अब 15 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे पहले यह 6 प्रतिशत थी। सरकार ने बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया है, जबकि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि विदेशों से भारत आने वाला सोना अब पहले की तुलना में काफी महंगा पड़ेगा।

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सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से तय कोटे के तहत आने वाले सोने पर मिलने वाली रियायती ड्यूटी दरों में भी बदलाव किया है। इससे उन आयातकों पर अतिरिक्त असर पड़ेगा जो UAE के जरिए बड़े पैमाने पर सोना मंगाते हैं।

आम ग्राहकों की जेब पर बढ़ेगा बोझ

सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर आम ग्राहकों और ज्वेलरी कारोबार पर देखने को मिल सकता है। आयात महंगा होने से सर्राफा व्यापारियों की लागत बढ़ेगी और इसका असर सीधे ग्राहकों तक पहुंचेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि शादी-ब्याह के सीजन में सोने के गहनों की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। इसके अलावा निवेश के तौर पर सोना खरीदने वाले लोगों को भी अब अधिक रकम खर्च करनी पड़ सकती है। पिछले कुछ वर्षों में सोना सुरक्षित निवेश का बड़ा विकल्प बनकर उभरा है, लेकिन बढ़ती ड्यूटी के कारण अब निवेशकों का तरीका भी बदल सकता है।

उद्योगों पर भी पड़ेगा असर

सोना और चांदी सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित नहीं हैं। कई उद्योगों में इन धातुओं का इस्तेमाल बड़े स्तर पर किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और रिसाइक्लिंग सेक्टर में भी इनकी मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में आयात लागत बढ़ने से इन उद्योगों के उत्पादन खर्च में भी इजाफा होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे माल की लागत बढ़ती है तो उसका असर बाजार में बिकने वाले कई उत्पादों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। इससे उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है।

लगातार बढ़ रहा है गोल्ड इंपोर्ट

लगातार बढ़ रहा है गोल्ड इंपोर्ट

भारत में बीते कुछ वर्षों के दौरान गोल्ड इंपोर्ट में लगातार तेजी देखी गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का गोल्ड इंपोर्ट 24 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा करीब 58 अरब डॉलर था।

हालांकि मात्रा के हिसाब से सोने के आयात में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वित्त वर्ष में 757.09 टन सोना आयात हुआ था, जबकि इस बार यह घटकर 721.03 टन रह गया। इसके बावजूद मूल्य के हिसाब से आयात में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। भारत को चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड उपभोक्ता माना जाता है।

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स्विट्जरलैंड से आता है सबसे ज्यादा सोना

भारत में सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से आयात किया जाता है। देश के कुल गोल्ड इंपोर्ट में स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत बताई जाती है। इसके अलावा UAE और दक्षिण अफ्रीका भी भारत के बड़े गोल्ड सप्लायर देशों में शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक देश के कुल आयात में अकेले सोने की हिस्सेदारी अब 9 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। यही वजह है कि सरकार विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए आयात नियंत्रण की दिशा में कदम उठा रही है।

पहले राहत दी गई, अब फिर बढ़ी ड्यूटी

दिलचस्प बात यह है कि जुलाई 2024 के बजट में सरकार ने सोने पर लगने वाली कुल इंपोर्ट ड्यूटी को 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया था। उस समय इसका उद्देश्य बाजार को राहत देना और तस्करी को नियंत्रित करना था। लेकिन अब बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा पर दबाव को देखते हुए सरकार ने दोबारा ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया है। माना जा रहा है कि इस कदम से सरकार आयात कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश कर रही है।

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