Paper Cup Cancer Risk News: घर से बाहर निकलते ही चाय या कॉफी पीने के लिए ज्यादातर लोगों की पहली पसंद पेपर कप बन गए हैं। प्लास्टिक कप की तुलना में इन्हें अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर माना जाता है। लेकिन अब स्वास्थ्य एक्सपर्ट्स और कुछ रिसर्च इस धारणा पर सवाल उठा रहे हैं। भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनीष शर्मा ने लोगों को पेपर कप के लगातार इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
पेपर कप के अंदर क्यों लगाई जाती है कोटिंग?
दरअसल, पेपर कप पूरी तरह कागज के नहीं होते। इनमें तरल पदार्थ के रिसाव को रोकने के लिए अंदर की तरफ पॉलीइथिलीन प्लास्टिक की एक पतली परत चढ़ाई जाती है। यही परत कप को वाटरप्रूफ बनाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब इन कपों में गर्म चाय, कॉफी या अन्य गर्म पेय डाले जाते हैं, तो यह कोटिंग प्रभावित हो सकती है और बेहद छोटे माइक्रोप्लास्टिक कण निकल सकते हैं। ये कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें सामान्य आंखों से देख पाना संभव नहीं होता।
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रिसर्च में क्या सामने आया?
आईआईटी खड़गपुर की एक रिसर्च के मुताबिक, यदि किसी पेपर कप में लगभग 15 मिनट तक गर्म तरल पदार्थ रखा जाए तो उसमें माइक्रोप्लास्टिक कण निकल सकते हैं। शोध में यह भी बताया गया कि एक पेपर कप से करीब 20,000 से 25,000 माइक्रोप्लास्टिक कण निकलने की संभावना हो सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये कण शरीर में पहुंचकर कोशिकाओं के स्तर पर असर डाल सकते हैं और लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का कारण बन सकते हैं।
सेहत पर क्या पड़ सकता है असर?

डॉ. मनीष शर्मा के अनुसार, लंबे समय तक माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क में रहने से शरीर पर कई तरह के प्रभाव पड़ सकते हैं। उनका कहना है कि ये कण कोशिकाओं के डीएनए स्ट्रक्चर को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे भविष्य में गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव, इम्यूनिटी पर असर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका भी जताई जाती है। इसी वजह से पेपर कप के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह दी जा रही है।
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बेहतर विकल्प क्या हैं?
स्वास्थ्य एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि जहां संभव हो, वहां पेपर और प्लास्टिक कप की जगह सिरेमिक या स्टेनलेस स्टील के कपों का इस्तेमाल किया जाए। वहीं, बाहर चाय या कॉफी पीने के दौरान मिट्टी का कुल्हड़ एक बेहतर विकल्प माना जाता है। इससे प्लास्टिक आधारित सामग्री के संपर्क को कम किया जा सकता है और पर्यावरण को भी फायदा पहुंचता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय, डाइट में बदलाव या बीमारी के इलाज से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

दानियाल, एक अनुभवी मल्टीमीडिया पत्रकार हैं। Hind 24 की डिजिटल डेस्क पर सीनियर पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 6 वर्षों का अनुभव है। Hind 24 पर तेज और विश्वसनीय अपडेट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।






