
कर्मचारी संगठन 8th Pay Commission में ₹54,000 न्यूनतम बेसिक सैलरी की मांग कर रहे हैं। | Image Source - Social Media
8th Pay Commission Salary Hike: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच 8th Pay Commission Salary Hike को लेकर चर्चा और बहस तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा आर्थिक हालात और बढ़ती महंगाई को देखते हुए कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ा इजाफा होना चाहिए।
इसी कारण कई कर्मचारी संगठन न्यूनतम बेसिक सैलरी को ₹18,000 से बढ़ाकर ₹54,000 करने की मांग कर रहे हैं। अगर यह मांग स्वीकार कर ली जाती है तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों की आय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
फिटमेंट फैक्टर 3.0 की मांग
कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के लिए 3.0 से 3.25 के बीच फिटमेंट फैक्टर लागू करने की सिफारिश की है। फिटमेंट फैक्टर वह गुणक होता है जिसके आधार पर कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी को नई सैलरी में परिवर्तित किया जाता है। यदि 3.0 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो मौजूदा ₹18,000 की न्यूनतम बेसिक सैलरी सीधे बढ़कर करीब ₹54,000 हो सकती है। इसी कारण यह मांग कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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FNPO ने भेजा मेमोरेंडम
कर्मचारी संगठन फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशंस (FNPO) ने इस विषय में नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) को एक विस्तृत मेमोरेंडम भेजा है। इस मेमोरेंडम में वेतन ढांचे में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इसमें न्यूनतम वेतन बढ़ाने के साथ-साथ फिटमेंट फैक्टर को भी बढ़ाने की सिफारिश की गई है, ताकि कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई के बीच बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
न्यूनतम वेतन तय करने का आधार
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 1957 की 15वीं इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस (ILC) के मानकों को आधार बनाया जाता है। इन मानकों के अनुसार वेतन का निर्धारण कर्मचारियों के परिवार की दैनिक जरूरतों और जीवनयापन के खर्च को ध्यान में रखकर किया जाता है। यही वजह है कि वेतन गणना के दौरान एक विस्तृत खपत टोकरी (Consumption Basket) तैयार की जाती है जिसमें भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरी चीजें शामिल होती हैं।
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3 सदस्यीय परिवार के खर्च का कैलकुलेशन
न्यूनतम वेतन तय करने के लिए तैयार की गई खपत टोकरी में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के खर्च को शामिल किया जाता है। इसमें भोजन, कपड़े, घर का किराया, बिजली, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और परिवहन जैसी जरूरतें शामिल होती हैं। इन सभी खर्चों को जोड़कर यह अनुमान लगाया जाता है कि एक कर्मचारी को अपने परिवार के लिए न्यूनतम कितनी आय की आवश्यकता होगी। इसी आधार पर कर्मचारी संगठन ₹54,000 की न्यूनतम बेसिक सैलरी की मांग कर रहे हैं।
बड़े शहरों के औसत दाम से गणना
वेतन का यह अनुमान केवल एक शहर के खर्च के आधार पर नहीं लगाया गया है। इसके लिए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, भुवनेश्वर और तिरुवनंतपुरम जैसे बड़े शहरों के औसत रिटेल दामों को शामिल किया गया है। इन शहरों में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों को जोड़कर औसत खर्च निकाला गया है, जिससे कर्मचारियों के जीवनयापन की वास्तविक लागत का अंदाजा लगाया जा सके।
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परिवार यूनिट बढ़ाने की मांग
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि आज के समय में अधिकांश कर्मचारियों को अपने माता-पिता की जिम्मेदारी भी उठानी पड़ती है। इसलिए केवल 3 सदस्यीय परिवार के आधार पर वेतन तय करना वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता। इसी कारण FNPO ने सुझाव दिया है कि परिवार की यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5 सदस्य माना जाए। यदि यह प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है तो न्यूनतम बेसिक सैलरी का अनुमान ₹76,000 से अधिक तक पहुंच सकता है।
महंगाई और बढ़ते खर्च का असर
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि कोविड महामारी के बाद चिकित्सा खर्च, शिक्षा और आवास जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में मौजूदा वेतन संरचना कर्मचारियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन वेतन आयोग से वास्तविक जीवन खर्च को ध्यान में रखते हुए नई सैलरी संरचना लागू करने की मांग कर रहे हैं।
FNPO की मुख्य सिफारिशें
FNPO ने 8वें वेतन आयोग के लिए कुछ प्रमुख सुझाव भी दिए हैं। इन सिफारिशों में कहा गया है कि न्यूनतम बेसिक सैलरी कम से कम ₹54,000 तय की जाए और फिटमेंट फैक्टर कम से कम 3.0 रखा जाए। इसके अलावा आवास खर्च को 7.5 प्रतिशत से कम न रखने और वेतन में 25 प्रतिशत स्किल कंपोनेंट जोड़ने की भी मांग की गई है।
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सरकार के फैसले पर टिकी उम्मीदें
यदि कर्मचारी संगठनों की ये मांगें स्वीकार कर ली जाती हैं तो 8th Pay Commission Salary Hike के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। इससे न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सुधार आने की उम्मीद है। फिलहाल लाखों कर्मचारी सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

तानिया, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक अनुभवी लेखिका हैं। जिन्हें क्रिकेट, फिल्में, मूवी रिव्यू, ट्रेंडिंग खबरें, लाइफस्टाइल और बिजनेस जैसे विषयों पर कंटेंट लिखने का 4 वर्षों का अनुभव है। वह Hind 24 के लिए काम कर रही हैं।


