PMFBY Scheme News: देश में खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है, जहां कभी सूखा तो कभी बाढ़, ओलावृष्टि या कीट रोग किसानों की मेहनत पर पानी फेर देते हैं। ऐसे हालात में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY Scheme) शुरू की है। अब इस योजना को लेकर एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है कि इसका लाभ सिर्फ जमीन मालिक किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि बटाई पर खेती करने वाले किसान भी इसका फायदा उठा सकते हैं।
लिखित प्रमाण पत्र जरूरी, तभी मिलेगा लाभ
बटाईदार और किराएदार किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तों को पूरा करना होता है। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि उन्हें जमीन के असली मालिक से एक लिखित प्रमाण पत्र लेना होगा। इस प्रमाण पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि संबंधित किसान उस जमीन पर खेती कर रहा है और फसल नुकसान की स्थिति में बीमा का लाभ उसी किसान को दिया जाएगा। यह दस्तावेज योजना में शामिल होने के लिए अनिवार्य माना गया है।
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बीमा कराने की अंतिम तिथि का रखें ध्यान
- फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए समय सीमा का पालन करना बेहद जरूरी है।
- खरीफ सीजन के लिए बीमा कराने की अंतिम तिथि आमतौर पर 31 जुलाई निर्धारित की जाती है।
- तय समय सीमा के भीतर आवेदन न करने पर किसान बीमा कवर से वंचित रह सकता है।
- किसानों को समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी जाती है।
KCC धारकों के लिए खास नियम
जिन किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) है, उनके लिए कुछ अलग नियम लागू होते हैं। ऐसे किसानों को अपने आधार कार्ड की कॉपी समय पर बैंक में जमा करनी होती है, ताकि बीमा प्रक्रिया पूरी हो सके। अगर कोई किसान इस योजना का लाभ नहीं लेना चाहता है, तो उसे निर्धारित समय के भीतर बैंक को लिखित सूचना देनी होगी। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो किसान को स्वतः ही योजना में शामिल माना जा सकता है।
किन फसलों का कराया जा सकता है बीमा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत विभिन्न सीजन की फसलों को कवर किया जाता है। खरीफ सीजन में धान, मक्का, मूंगफली और अरहर जैसी फसलें शामिल हैं। वहीं रबी सीजन में गेहूं, जौ, चना और सरसों जैसी प्रमुख फसलों का बीमा कराया जा सकता है। इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों में अधिसूचित फसलों के आधार पर अन्य फसलों को भी योजना में शामिल किया जाता है।
प्रीमियम दरें हैं बेहद कम
इस योजना की एक बड़ी खासियत यह है कि किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना होता है। खरीफ फसलों के लिए करीब 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए लगभग 1.5 प्रतिशत और वाणिज्यिक व बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम निर्धारित है। बाकी प्रीमियम राशि का भार केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाती हैं, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है।
किन परिस्थितियों में मिलता है बीमा कवर
PMFBY Scheme के तहत कई तरह की प्राकृतिक और अन्य आपदाओं को कवर किया जाता है। इसमें सूखा, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि, कीट और रोग से होने वाला नुकसान शामिल है। इसके अलावा बुवाई न हो पाने की स्थिति, कटाई के बाद 14 दिनों तक होने वाला नुकसान और स्थानीय आपदाएं जैसे भूस्खलन या जलभराव भी बीमा कवर के दायरे में आते हैं।
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नुकसान की सूचना देने का नियम
यदि किसी किसान की फसल को नुकसान होता है, तो उसे इसकी सूचना निर्धारित समय के भीतर देना जरूरी होता है। योजना के नियमों के अनुसार, किसान को 72 घंटे के अंदर संबंधित विभाग या बीमा कंपनी को नुकसान की जानकारी देनी होती है। समय पर सूचना देने से ही क्लेम प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हो पाती है और किसान को मुआवजा मिल सकता है।
फसल बीमा आवेदन की समय सीमा से जुड़े मुख्य बिंदु
| मुख्य बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| समय सीमा का महत्व | फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित समय सीमा का पालन करना जरूरी है। |
| अंतिम तिथि | खरीफ सीजन के लिए बीमा कराने की अंतिम तिथि आमतौर पर 31 जुलाई होती है। |
| आवेदन न करने का नुकसान | समय सीमा के भीतर आवेदन न करने पर किसान बीमा कवर से वंचित रह सकता है। |
| किसानों के लिए सलाह | किसानों को समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए। |

अजय सिंह, पिछले 4 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में हैं और प्रिंट व डिजिटल मीडिया का अनुभव रखते हैं। बिजनेस, वित्त, निवेश, बाजार ट्रेंड्स और सरकारी योजनाओं से जुड़ी खबरों पर खास पकड़ है। फिलहाल वह Hind 24 के लिए कार्यरत हैं।






