पेट से लेकर दिमाग तक, कई समस्याओं में कारगर है अपराजिता, आचार्य बालकृष्ण ने बताया सही इस्तेमाल

Aparajita Flowers Benefits: अपराजिता का पौधा सिर्फ घर की सुंदरता ही नहीं बढ़ाता, बल्कि आयुर्वेद में इसके फूल, पत्ते और जड़ का उपयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए किया जाता है।
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Aparajita Flowers Benefits Hindi: बारिश के मौसम में बगीचों और घरों के आसपास अपराजिता का पौधा आसानी से देखा जा सकता है। यह एक बेलनुमा और झाड़ीदार पौधा होता है, जिसके फूल और पत्ते काफी कोमल होते हैं। आयुर्वेद में अपराजिता का विशेष महत्व बताया गया है। इसे विष्णुक्रांता और गोकर्णी जैसे नामों से भी जाना जाता है। माना जाता है कि यह ऐसा पौधा है जो रोगों से लड़ने की क्षमता के कारण विशेष पहचान रखता है। आचार्य बाल कृष्ण के अनुसार, अपराजिता के फूल, पत्ते और जड़ का उपयोग कई आयुर्वेदिक उपायों में किया जाता है।

पौधे की पहचान और विशेषताएं

अपराजिता के पौधे में मुख्य रूप से सफेद, नीले और बैंगनी रंग के फूल आते हैं। इसके फूलों का आकार गाय के कान जैसा दिखाई देता है, इसलिए इसे गोकर्णी भी कहा जाता है। नीले और बैंगनी रंग की किस्मों में इकहरे और दोहरे फूल वाली बेलें पाई जाती हैं। इस पौधे को क्लाइटोरिया टर्नेटिया और विंग्ड लीव्ड क्लाइटोरिया नाम से भी जाना जाता है। बारिश के दिनों में यह पौधा फूलों से भर जाता है और घरों की सुंदरता बढ़ाता है।

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सिरदर्द में उपयोग की जानकारी

आचार्य बाल कृष्ण के अनुसार, अपराजिता की फली, बीज और जड़ का उपयोग सिरदर्द से राहत पाने के लिए किया जाता है। इसके बीज और जड़ को बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ पीसकर तैयार मिश्रण की कुछ बूंदें नाक में डालने की सलाह दी जाती है। बताया जाता है कि इससे आधासीसी यानी माइग्रेन जैसे सिरदर्द में आराम मिल सकता है।

कान दर्द में राहत का पारंपरिक उपाय

कान दर्द में राहत का पारंपरिक उपाय

बारिश के मौसम में नमी बढ़ने के कारण कई लोगों को कान दर्द की समस्या हो सकती है। ऐसे में अपराजिता के पत्तों के रस का उपयोग पारंपरिक उपाय के रूप में किया जाता है। पत्तों के रस को सुखाकर हल्का गर्म करने के बाद कान के बाहरी हिस्से पर लेप की तरह लगाने से दर्द में राहत मिलने की बात कही जाती है।

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गले की परेशानी में उपयोग

गले में घाव या टॉन्सिल की समस्या होने पर अपराजिता के पत्तों का काढ़ा उपयोगी माना जाता है। इसके लिए लगभग 10 ग्राम पत्तों को आधा लीटर पानी में उबालकर पानी आधा होने तक पकाया जाता है। इसके बाद इसे छानकर गुनगुना पीने की सलाह दी जाती है। इससे गले और आवाज को आराम मिलने की जानकारी दी गई है।

पेट और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद

अपराजिता की जड़ का चूर्ण बनाकर गाय के दूध या घी के साथ सेवन करने से अपच, गैस, एसिडिटी और पेट में जलन जैसी समस्याओं में राहत मिलने की बात कही जाती है। वहीं, तनाव और चिंता से परेशान लोगों के लिए इसके फूलों से तैयार ब्लू टी को उपयोगी माना जाता है। आचार्य बाल कृष्ण के अनुसार, यह चाय दिमाग को शांत करने और मानसिक थकान कम करने में मदद कर सकती है।

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