गर्मियों में सही आटे की रोटी चुनें, पेट रहेगा हल्का और डाइजेशन रहेगा बेहतर

Best and Worst Roti for Summer: गर्मियों में कौन-से आटे की रोटी सेहत के लिए फायदेमंद है और किन आटों से दूरी बनानी चाहिए? जानिए पाचन, ठंडक और संतुलित डाइट के लिए सही विकल्प।
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Best and Worst Roti for Summer: गर्मियों में खान-पान का सीधा असर शरीर और पाचन तंत्र पर पड़ता है। ऐसे मौसम में केवल फल और सब्जियां ही नहीं, बल्कि रोटी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले आटे का चुनाव भी अहम माना जाता है। कुछ आटे शरीर को ठंडक देने और डाइजेशन को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं, जबकि कुछ आटे पेट से जुड़ी परेशानियां बढ़ा सकते हैं।

ये आटे गर्मियों में माने जाते हैं बेहतर विकल्प

  • ज्वार की रोटी: गर्मियों के लिए अच्छा विकल्प मानी जाती है।
  • ठंडी तासीर: ज्वार के आटे की तासीर ठंडी बताई जाती है।
  • ग्लूटेन-फ्री विकल्प: गेहूं से परहेज करने वालों के लिए उपयुक्त हो सकती है।
  • फाइबर से भरपूर: पाचन को बेहतर बनाने और कब्ज की समस्या से बचाने में मदद करती है।
  • जौ का आटा: शरीर के तापमान को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है।
  • डाइजेशन सपोर्ट: जौ का आटा गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को कम करने में मददगार माना जाता है।

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चावल के आटे की रोटी हल्की और आसानी से पचने वाली होती है। इसकी ठंडी तासीर शरीर को राहत देने में मदद करती है। वहीं शेफ पंकज भदौरिया के अनुसार रागी की रोटी गर्मियों में फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि इसमें कैल्शियम और अमीनो एसिड अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने और पसीने के साथ निकलने वाले जरूरी मिनरल्स की कमी पूरी करने में मदद करते हैं।

गेहूं और हल्की मल्टीग्रेन रोटी भी हैं अच्छे विकल्प

गेहूं और हल्की मल्टीग्रेन रोटी भी हैं अच्छे विकल्प
  • गेहूं की रोटी: संतुलित आहार का अच्छा विकल्प मानी जाती है।
  • फाइबर से भरपूर: पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।
  • गर्मियों में बेहतर कॉम्बिनेशन: लौकी, तोरी, टिंडा जैसी पानी वाली सब्जियों और दही के साथ खाना लाभकारी माना जाता है।
  • हल्की मल्टीग्रेन रोटी: गेहूं, ज्वार और जौ के मिश्रण से बनाई जा सकती है।
  • पोषक तत्वों का स्रोत: ऐसी मल्टीग्रेन रोटी फाइबर और प्रोटीन की अच्छी मात्रा प्रदान कर सकती है।

इन आटों की रोटी का अधिक सेवन करने से बचें

गर्मियों में मक्के और बाजरे के आटे की रोटी का अधिक सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इनकी तासीर गर्म मानी जाती है। अधिक मात्रा में सेवन करने पर कुछ लोगों में कब्ज, एसिडिटी और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसी तरह अगर मल्टीग्रेन आटे में बाजरा, मक्का या अन्य गर्म तासीर वाले अनाज अधिक मात्रा में हों, तो वह भी इस मौसम में भारी महसूस हो सकता है। वहीं मैदे से बनी रोटी और अन्य खाद्य पदार्थ पचने में भारी होते हैं और पेट फूलना, कब्ज, एसिडिटी तथा सुस्ती जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।

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डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न प्रचलित मान्यताओं और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। किसी भी आहार में बदलाव करने या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने से पहले डॉक्टर या योग्य न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें।

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