
मिडिल ईस्ट संकट से प्रभावित LNG सप्लाई | (Image - Vecteezy)
LNG Crisis in India: भारत इस समय लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की कमी का सामना कर रहा है, जिसकी मुख्य वजह पश्चिमी एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव है। मिडिल ईस्ट में संघर्ष के चलते LNG सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर सीधा असर पड़ा है। खासतौर पर कतर से आने वाली सप्लाई बाधित होने के कारण घरेलू बाजार में दबाव बढ़ गया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना बड़ा संकट बिंदु
दुनिया की लगभग 20% LNG सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरती है। हालिया संघर्ष के चलते इस अहम समुद्री मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है। जहाजों की आवाजाही रुकने से न सिर्फ सप्लाई बाधित हुई है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता भी बढ़ी है। इसका सीधा असर भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देशों पर पड़ा है।
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कतर की रास लफान सुविधा पर हमले का असर
कतर की प्रमुख LNG उत्पादन इकाई रास लफान पर हुए हमले ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस हमले के बाद उत्पादन क्षमता में लगभग 17% की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस नुकसान की भरपाई में कई साल लग सकते हैं, जिससे आने वाले समय में भी सप्लाई पर दबाव बना रह सकता है।
आयात पर भारी निर्भरता से बढ़ी चुनौती
भारत अपनी LNG जरूरतों का लगभग 40-45% हिस्सा कतर और अन्य पश्चिमी एशियाई देशों से आयात करता है। वित्त वर्ष 2025 में भारत ने करीब 27 मिलियन टन LNG आयात की, जिस पर लगभग 14.9 बिलियन डॉलर खर्च हुए। घरेलू उत्पादन सीमित होने के कारण देश को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे वैश्विक संकट का असर तेजी से दिखाई देता है।
उद्योगों पर पड़ा सीधा असर
LNG की कमी का असर सबसे ज्यादा औद्योगिक क्षेत्रों पर देखा जा रहा है। सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए फर्टिलाइजर और अन्य उद्योगों की गैस सप्लाई में कटौती की है। फर्टिलाइजर सेक्टर को केवल 70% और अन्य उद्योगों को लगभग 80% गैस सप्लाई मिल रही है, जिससे उत्पादन लागत और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।
सप्लाई संकट से निपटने के उपाय
भारत सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। सबसे पहले, LNG आयात को विविध स्रोतों से सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और अल्जीरिया जैसे देशों से आयात बढ़ाया गया है। इसके अलावा, घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।
LNG और LPG में मूलभूत अंतर
LNG और LPG दोनों ही गैस हैं, लेकिन उनकी संरचना और उपयोग अलग-अलग है। LPG मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होती है, जिसे कच्चे तेल के प्रसंस्करण के दौरान प्राप्त किया जाता है। वहीं LNG लगभग शुद्ध मीथेन गैस होती है, जिसे अत्यधिक ठंडा कर तरल रूप में बदला जाता है ताकि उसे आसानी से परिवहन किया जा सके।
उत्पादन और प्रोसेसिंग का अंतर
जब प्राकृतिक गैस को जमीन से निकाला जाता है, तो उसमें कई प्रकार की गैसें मौजूद होती हैं। प्रोसेसिंग के दौरान भारी गैसों को अलग कर दिया जाता है और शुद्ध मीथेन को -162°C पर ठंडा कर LNG में बदला जाता है। दूसरी ओर, LPG एक उप-उत्पाद के रूप में रिफाइनरी में तैयार होती है।
CNG और PNG का LNG से संबंध
LNG को जब सामान्य तापमान पर वापस गैस में बदला जाता है, तो इसका उपयोग अलग-अलग रूपों में किया जाता है। जब इसे दबाकर सिलेंडर में भरा जाता है, तो इसे CNG कहा जाता है, जिसका उपयोग वाहनों में होता है। वहीं पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचने वाली गैस को PNG कहा जाता है। यानी CNG और PNG दोनों LNG के ही रूप हैं।
भविष्य में क्या रहेंगे संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक LNG की वैश्विक सप्लाई प्रभावित रह सकती है। ऐसे में भारत को ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक स्रोतों और घरेलू उत्पादन पर अधिक ध्यान देना होगा। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा की ओर भी तेजी से बढ़ना जरूरी होगा।

तानिया, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक अनुभवी लेखिका हैं। जिन्हें क्रिकेट, फिल्में, मूवी रिव्यू, ट्रेंडिंग खबरें, लाइफस्टाइल और बिजनेस जैसे विषयों पर कंटेंट लिखने का 4 वर्षों का अनुभव है। वह Hind 24 के लिए काम कर रही हैं।


