
जीएसटी कटौती के बाद शोरूम्स में बढ़ी ग्राहकों की चहल-पहल। | Photo: marutisuzuki
Small Car Sales Boom: बीते कुछ साल भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर, खासकर छोटी कारों के लिए किसी सूखे के समान थे। बढ़ती कीमतों और सख्त उत्सर्जन मानकों ने मिडिल क्लास के ‘कार के सपने’ पर ब्रेक लगा दिया था।
दिग्गज कंपनियां, विशेषकर मारुति सुजुकी, इस बात को लेकर बेहद चिंतित थीं कि आखिर उनका सबसे मजबूत किला यानी ‘एंट्री-लेवल सेगमेंट’ ढह क्यों रहा है। लेकिन, सितंबर 2025 में सरकार द्वारा उठाए गए एक क्रांतिकारी कदम ने पूरी तस्वीर बदल दी है।
अंकों की जुबानी: जब आंकड़ों ने दी विकास की गवाही

अगर आंकड़े बोलते, तो वे आज खुशी से चिल्ला रहे होते। जीएसटी कटौती के बाद छोटी कारों की मुश्किलों का अंत हो गया है। सरकार ने जैसे ही टैक्स की कैंची चलाई, बाजार में वो हुआ जो किसी चमत्कार से कम नहीं था। बीते चार महीनों के आंकड़े बताते हैं कि एंट्री-लेवल कारों की बिक्री में 100 प्रतिशत यानी दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह केवल टैक्स का खेल नहीं है, बल्कि उस आम भारतीय की जीत है जो सही कीमत का इंतजार कर रहा था।
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पीएम का आह्वान और खरीदारों का धैर्य
इस बदलाव की नींव अगस्त 2025 में ही पड़ गई थी। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से जीएसटी रिफॉर्म्स का संकेत दिया, तो हजारों परिवारों ने अपनी कार खरीदने की योजना को एक महीने के लिए टाल दिया। हर कोई सस्ती कार चाहता था और मीडिया में छपती खबरों ने इस उम्मीद को और पुख्ता कर दिया। आखिरकार, 22 सितंबर 2025 को वो ऐतिहासिक फैसला आया जिसने ऑटो सेक्टर की दिशा बदल दी।
टैक्स का गणित: आखिर कैसे सस्ती हुईं गाड़ियाँ?

सरकार ने 4 मीटर से छोटी उन पेट्रोल कारों (1200cc से कम) और डीजल कारों (1500cc से कम) पर लगने वाले जीएसटी को 28% से घटाकर सीधे 18% कर दिया। इस 10% की कटौती ने कीमतों पर सीधा प्रहार किया। मारुति सुजुकी की S-Presso अब 3.50 लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर आ गई, जिससे यह देश की सबसे सस्ती और सुलभ कार बन गई। टाटा, हुंडई और महिंद्रा ने भी अपनी कीमतों में भारी कटौती कर ग्राहकों को अपनी ओर खींचा।
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सियाम (SIAM) की रिपोर्ट: रिकवरी की ठोस कहानी
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच मिनी सेगमेंट की औसत बिक्री महज 7,167 यूनिट थी। लेकिन जीएसटी कट के बाद, अक्टूबर से जनवरी के बीच यह औसत बढ़कर 12,945 यूनिट हो गया। जनवरी 2026 में तो बिक्री ने आसमान छू लिया और 14,771 यूनिट का आंकड़ा पार कर लिया। यह दर्शाता है कि मांग अस्थायी नहीं, बल्कि टिकाऊ है।
मारुति सुजुकी: सेगमेंट का निर्विवाद राजा
जब हम छोटी कारों की बात करते हैं, तो मारुति का नाम सबसे पहले आता है। इस सेगमेंट में मारुति की हिस्सेदारी 96% से भी अधिक है। जीएसटी कटौती से पहले मारुति करीब 6,734 गाड़ियाँ बेच रही थी, जो अब बढ़कर 12,477 यूनिट हो गई है।
रेनॉ क्विड भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। मारुति के चेयरमैन आर.सी. भार्गव और सेल्स हेड पार्थो बनर्जी की पुरानी चिंताएं अब राहत में बदल गई हैं, क्योंकि पहली बार कार खरीदने वाला ग्राहक अब शोरूम की ओर लौट आया है।

रायमीन, एक अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी जैसे विषयों पर लिखने का 3 वर्षों का अनुभव है। वह Hind 24 के साथ जुड़ी हुई हैं और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाती हैं।


