Diabetes Eye Problems Risk: डायबिटीज को आमतौर पर दिल, किडनी और नसों से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन इसका सबसे खतरनाक असर आंखों पर भी पड़ता है। यह नुकसान अचानक नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे और बिना किसी दर्द के बढ़ता है। यही कारण है कि अधिकतर लोग तब तक सतर्क नहीं होते जब तक उनकी दृष्टि पर गंभीर असर नहीं पड़ जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति ‘Silent Vision Loss’ की तरह काम करती है, जो समय रहते पहचान न होने पर स्थायी अंधेपन का कारण बन सकती है।
आंख कैसे होती है प्रभावित, समझिए पूरी प्रक्रिया
- आंख कैमरे की तरह काम करती है
- रेटिना तस्वीरों को कैद कर दिमाग तक भेजती है
- रेटिना में बहुत महीन रक्त वाहिकाएं होती हैं
- लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर से नसें कमजोर होती हैं
- रक्त वाहिकाओं में सूजन (Swelling) आ सकती है
- नसों में रिसाव (Leakage) हो सकता है
- ब्लॉकेज (Blockage) बनने का खतरा रहता है
- नई रक्त वाहिकाएं बनती हैं, लेकिन बहुत नाजुक होती हैं
- ये नसें आसानी से फट सकती हैं
- स्थिति धीरे-धीरे और गंभीर हो सकती है
डायबिटिक रेटिनोपैथी: नजर छीनने वाली बीमारी

इस पूरी प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है जो दुनिया भर में दृष्टि हानि के प्रमुख कारणों में शामिल है। खास बात यह है कि इसके शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए मरीज को तब तक पता नहीं चलता जब तक रेटिना को काफी नुकसान नहीं पहुंच जाता। यही कारण है कि इसे ‘साइलेंट थ्रेट’ माना जाता है।
सिर्फ एक नहीं, कई आंखों की बीमारियों का खतरा
- डायबिटिक रेटिनोपैथी का खतरा
- डायबिटिक मैक्युलर एडीमा होने की संभावना
- मोतियाबिंद (Cataract) का बढ़ता जोखिम
- ग्लूकोमा (Glaucoma) का खतरा
- नजर कमजोर होना या धुंधला दिखना
- लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर से जटिलताएं बढ़ना
- गंभीर मामलों में स्थायी दृष्टि हानि (Vision Loss) का जोखिम
लक्षण देर से दिखते हैं, लेकिन होते हैं खतरनाक

इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इसके लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देते। जब समस्या बढ़ जाती है, तब मरीज को धुंधला दिखाई देना, आंखों के सामने काले धब्बे (फ्लोटर्स), रात में देखने में परेशानी और अचानक दृष्टि में बदलाव जैसे संकेत महसूस होते हैं। कई बार यह बदलाव इतना तेज होता है कि मरीज को तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है।
अन्य बीमारियां और आदतें बढ़ाती हैं जोखिम
डायबिटीज का असर अकेले नहीं आता, बल्कि यह शरीर में एक चेन रिएक्शन पैदा करता है। हाई ब्लड शुगर के साथ अगर हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल भी जुड़ जाए, तो आंखों को नुकसान और तेजी से बढ़ सकता है। इसके अलावा धूम्रपान करने से शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे आंखों की कोशिकाएं और ज्यादा प्रभावित होती हैं। इसलिए जीवनशैली भी इस समस्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कैसे करें बचाव, समय रहते उठाएं सही कदम
- ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें
- संतुलित और पोषक आहार लें
- रोजाना नियमित व्यायाम करें
- तनाव को कम करने की कोशिश करें
- फाइबर युक्त भोजन को डाइट में शामिल करें
- हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं
- समय-समय पर आंखों की जांच कराएं
नियमित आंखों की जांच है सबसे बड़ा हथियार
विशेषज्ञों का मानना है कि हर डायबिटीज मरीज को साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए, भले ही उसे कोई समस्या महसूस न हो। शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर इलाज आसान और प्रभावी होता है। लेजर थेरेपी, इंजेक्शन और अन्य आधुनिक उपचारों के जरिए नजर को बचाया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी विशेषज्ञों की राय और शोध अध्ययनों पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी लक्षण या उपचार के लिए डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

तानिया, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक अनुभवी लेखिका हैं, जिन्हें हेल्थ और बिजनेस विषयों पर 4 वर्षों का अनुभव है। स्वास्थ्य और बिजनेस से जुड़ी सटीक व भरोसेमंद जानकारी साझा करती हैं और वर्तमान में Hind 24 के लिए कार्यरत हैं।






