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कैंसर का इलाज अब पहले से ज्यादा असरदार, नई तकनीकों से बढ़ीं मरीजों की उम्मीदें

Cancer Treatment Advances: कैंसर इलाज के क्षेत्र में इम्यूनोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और CAR T-Cell थेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकों ने नई उम्मीदें जगाई हैं।
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Immunotherapy and CAR T-Cell Therapy: मुरादाबाद: पिछले कुछ वर्षों में कैंसर इलाज के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां कैंसर के इलाज के लिए मुख्य रूप से सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी पर निर्भरता थी, वहीं अब चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति के कारण कई नई और उन्नत तकनीकें सामने आई हैं। इम्यूनोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, प्रिसिशन मेडिसिन और सेलुलर थेरेपी जैसी आधुनिक पद्धतियां मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आई हैं। इन उपचारों का उद्देश्य केवल कैंसर को नियंत्रित करना ही नहीं, बल्कि मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाना और स्वस्थ ऊतकों को कम से कम नुकसान पहुंचाना भी है।

टार्गेटेड थेरेपी से कम हो रहे दुष्प्रभाव

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट एवं यूनिट हेड डॉ. अभिनव नरवरिया ने बताया कि टार्गेटेड थेरेपी कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि और उनके फैलाव के लिए जिम्मेदार विशेष अणुओं को पहचानकर उन पर सीधे प्रभाव डालती है। इस कारण पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में इसके दुष्प्रभाव अपेक्षाकृत कम दिखाई देते हैं। वर्तमान में इस तकनीक का उपयोग फेफड़ों के कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, ओवेरियन कैंसर और क्रॉनिक मायलॉइड ल्यूकेमिया जैसे कई प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जा रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि यह तकनीक मरीजों को अधिक प्रभावी और सटीक इलाज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

CAR T-Cell थेरेपी ने खोले इलाज के नए रास्ते

CAR T-Cell थेरेपी ने खोले इलाज के नए रास्ते

डॉ. अभिनव नरवरिया के अनुसार, CAR T-Cell थेरेपी कैंसर इलाज के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में उभर रही है। इस प्रक्रिया में मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली की टी-कोशिकाओं को शरीर से निकालकर प्रयोगशाला में आनुवंशिक रूप से संशोधित किया जाता है और फिर उन्हें दोबारा शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है। संशोधित टी-कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन पर अधिक प्रभावी तरीके से हमला करती हैं। यह तकनीक विशेष रूप से कुछ रक्त संबंधी कैंसर के इलाज में सकारात्मक परिणाम दे रही है और भविष्य में इसके उपयोग का दायरा और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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लिक्विड बायोप्सी से शुरुआती पहचान और निगरानी आसान

  • लिक्विड बायोप्सी कैंसर की जांच और निगरानी के लिए एक उन्नत तकनीक है।
  • इसमें केवल रक्त के नमूने के जरिए कैंसर से जुड़े संकेतों की पहचान की जाती है।
  • यह तकनीक कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाने में मदद करती है।
  • इलाज की प्रभावशीलता की निगरानी करना भी इसके जरिए आसान हो गया है।
  • कैंसर की पुनरावृत्ति के संकेत समय रहते पहचानने में सहायता मिलती है।
  • बार-बार जटिल और दर्दनाक जांच प्रक्रियाओं की आवश्यकता कम हो जाती है।
  • मरीजों के लिए जांच प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक और कम परेशानी वाली बन रही है।

व्यक्तिगत इलाज से बढ़ रही मरीजों की जीवन गुणवत्ता

डॉ. अभिनव नरवरिया ने बताया कि आधुनिक इलाज पद्धतियों के कारण मरीजों को बेहतर जीवित रहने की संभावना, बीमारी पर अधिक नियंत्रण और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार इलाज का लाभ मिल रहा है। हालांकि किसी भी इलाज की सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें कैंसर का प्रकार, उसकी अवस्था, आनुवंशिक विशेषताएं और मरीज का समग्र स्वास्थ्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए योग्य चिकित्सकों और एक्सपर्ट की सलाह लेकर उपलब्ध इलाज विकल्पों को समझना और उसी के आधार पर सर्वोत्तम इलाज का चयन करना सबसे महत्वपूर्ण है।

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समय पर जांच और सही सलाह

स्वास्थ्य एक्सपर्ट्स का मानना है कि कैंसर के प्रति जागरूकता, समय पर जांच और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच इलाज की सफलता में अहम भूमिका निभाती है। आज चिकित्सा विज्ञान लगातार नई तकनीकों और इलाज पद्धतियों की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में कैंसर के खिलाफ लड़ाई और अधिक प्रभावी बनने की उम्मीद दिखाई दे रही है। मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए और समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेकर उचित इलाज शुरू किया जाए।

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