Paratha Side Effects: भारतीय घरों में पराठा नाश्ते का एक बेहद लोकप्रिय हिस्सा है। आलू पराठा, पनीर पराठा या सादा पराठा, हर किसी की अपनी पसंद होती है। दही, मक्खन या अचार के साथ गरमा-गरम पराठा कई लोगों की सुबह को खास बना देता है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इसका सेवन रोजाना और ज्यादा मात्रा में किया जाए, तो इसका असर सेहत पर भी दिखाई दे सकता है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
- एक्सपर्ट्स के अनुसार, पराठा अपने आप में खराब भोजन नहीं माना जाता।
- इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि इसे किस तरह तैयार किया गया है।
- पराठे में इस्तेमाल होने वाले तेल या घी की मात्रा भी इसकी सेहत पर पड़ने वाले प्रभाव को तय करती है।
- व्यक्ति की लाइफस्टाइल और रोजाना की शारीरिक गतिविधियां भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं।
- अगर खानपान और फिजिकल एक्टिविटी के बीच संतुलन नहीं है, तो इसके कुछ नुकसान सामने आ सकते हैं।
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बढ़ सकता है वजन

पराठे में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है। लेकिन अगर रोजाना ज्यादा घी या तेल वाले पराठे खाए जाएं और शारीरिक गतिविधि कम हो, तो अतिरिक्त कैलोरी शरीर में फैट के रूप में जमा होने लगती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर वजन बढ़ने और मोटापे का खतरा भी बढ़ जाता है।
ब्लड शुगर पर असर
- ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर के स्तर को तेजी से बढ़ा सकते हैं।
- बैठकर काम करने वाली लाइफस्टाइल वाले लोगों के लिए यह स्थिति अधिक चिंता का कारण बन सकती है।
- शरीर अतिरिक्त ऊर्जा का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, तो यह धीरे-धीरे जमा होने लगती है।
- समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है।
- इससे टाइप-2 डायबिटीज होने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
दिल की सेहत पर भी असर

अगर पराठा नियमित रूप से ज्यादा घी, मक्खन या तेल के साथ खाया जाए, तो शरीर में सैचुरेटेड फैट की मात्रा बढ़ सकती है। इससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के साथ-साथ दिल से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ जाता है। हाई कोलेस्ट्रॉल या पहले से हार्ट से जुड़ी परेशानी वाले लोगों को सीमित मात्रा में इसका सेवन करने की सलाह दी जाती है।
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पाचन से जुड़ी परेशानी
कुछ लोगों को रोजाना पराठा खाने के बाद एसिडिटी, अपच या पेट फूलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ज्यादा तेल वाले पराठे पचने में समय लेते हैं। अगर खाने में फाइबर और प्रोटीन की मात्रा कम हो, तो पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
एक जैसा नाश्ता भी ठीक नहीं
- एक्सपर्ट्स के अनुसार, रोजाना एक ही तरह का नाश्ता करना पोषण के लिहाज से सही नहीं माना जाता।
- हर दिन केवल पराठा खाने से शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते।
- इससे विटामिन और मिनरल की कमी का खतरा बढ़ सकता है।
- लंबे समय तक ऐसा खानपान पोषण के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
- संतुलित और विविध आहार शरीर की जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है।
निष्कर्ष
पराठा भारतीय खानपान का अहम हिस्सा है और इसे पूरी तरह नुकसानदायक नहीं माना जाता। हालांकि इसकी मात्रा, बनाने का तरीका और व्यक्ति की लाइफस्टाइल यह तय करती है कि इसका शरीर पर क्या असर होगा। इसलिए संतुलित खानपान और अलग-अलग पोषक तत्वों से भरपूर भोजन को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बेहतर माना जाता है।

दानियाल, एक अनुभवी मल्टीमीडिया पत्रकार हैं। Hind 24 की डिजिटल डेस्क पर सीनियर पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 6 वर्षों का अनुभव है। Hind 24 पर तेज और विश्वसनीय अपडेट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।







