Healthy Eating Habits: भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में केवल दवाइयों पर ही नहीं, बल्कि सही जीवनशैली और सही Eating Habits पर भी जोर दिया गया है। आयुर्वेद के अनुसार व्यक्ति का स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह क्या खाता है, कब खाता है और किस तरीके से खाता है। आज के समय में खराब खानपान, अनियमित दिनचर्या और फास्ट फूड की वजह से पाचन संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में आयुर्वेद में बताए गए भोजन और पानी से जुड़े कुछ आसान नियम शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।
1. मल्टीग्रेन आटे की रोटी बन सकती है सेहत का मजबूत आधार
आयुर्वेद के अनुसार सिर्फ गेहूं के आटे की रोटी खाने के बजाय मल्टीग्रेन आटे का इस्तेमाल ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि 10 किलो गेहूं के आटे में 1 किलो सोयाबीन, 1 किलो जौ और 1 किलो बेसन मिलाकर तैयार किया गया आटा शरीर को अधिक पोषण देता है। इस तरह की Eating Habits शरीर को प्रोटीन, फाइबर और जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराती हैं। इससे पाचन बेहतर होता है और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है। मल्टीग्रेन आटे की रोटी वजन नियंत्रित रखने में भी मददगार मानी जाती है।
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2. आटे में हरी पत्तेदार सब्जियां मिलाने से बढ़ता है पोषण
आयुर्वेद में भोजन को औषधि के समान माना गया है। इसी वजह से आटा गूंथते समय उसमें हरी पत्तेदार सब्जियां मिलाने की सलाह दी जाती है। पालक, मेथी, बथुआ या सहजन के पत्तों को बारीक काटकर आटे में मिलाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कुल आटे में करीब 25 प्रतिशत हरी पत्तियां मिलाई जाएं तो रोटी ज्यादा पौष्टिक बनती है। ऐसी Eating Habits शरीर में आयरन, कैल्शियम और विटामिन की कमी को दूर करने में मदद कर सकती हैं। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर लंबे समय तक स्वस्थ बना रहता है।
3. खाने के तुरंत बाद पानी पीना क्यों माना जाता है गलत?
- आयुर्वेद में पानी पीने का सही समय बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।
- भोजन के दौरान ज्यादा पानी पीने से पाचन अग्नि कमजोर हो सकती है।
- खाने के साथ अधिक पानी पीने से बचने की सलाह दी जाती है।
- खाना खाने से लगभग आधा घंटा पहले पानी पीना बेहतर माना जाता है।
- भोजन के करीब 40 मिनट बाद पानी पीना फायदेमंद माना जाता है।
- जरूरत पड़ने पर खाने के दौरान एक-दो घूंट पानी लिया जा सकता है।
- सही Eating Habits अपनाने से गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।
4. भूख और प्यास के अनुसार भोजन करना है जरूरी
- भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए।
- बिना भूख के बार-बार खाना पाचन तंत्र पर दबाव डाल सकता है।
- जरूरत से ज्यादा पानी पीना शरीर के लिए नुकसानदायक माना जाता है।
- खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक पीने से बचना चाहिए।
- भोजन के दौरान चाय और कॉफी पीना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता।
- सही Eating Habits अपनाने से पाचन बेहतर रहता है।
- हेल्दी खानपान से शरीर अधिक ऊर्जावान महसूस करता है।
5. सूर्यास्त के बाद भोजन कम करने की सलाह
आयुर्वेद में रात को देर से भोजन करने से बचने की सलाह दी गई है। माना जाता है कि सूर्यास्त के बाद शरीर की पाचन क्षमता धीमी होने लगती है। ऐसे में देर रात भारी भोजन करने से मोटापा, गैस और अपच जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसके अलावा सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की परंपरा भी आयुर्वेद में बताई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार नियंत्रित Eating Habits शरीर को डिटॉक्स करने और पाचन तंत्र को आराम देने में मदद कर सकती हैं। हालांकि किसी भी बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
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Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी और आयुर्वेदिक मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, डाइट या उपवास से जुड़ा बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

तानिया, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक अनुभवी लेखिका हैं, जिन्हें हेल्थ और बिजनेस विषयों पर 4 वर्षों का अनुभव है। स्वास्थ्य और बिजनेस से जुड़ी सटीक व भरोसेमंद जानकारी साझा करती हैं और वर्तमान में Hind 24 के लिए कार्यरत हैं।






