Diabetes Liver Fibrosis Risk: टाइप-2 डायबिटीज को अब तक केवल ब्लड शुगर से जुड़ी बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन हालिया रिसर्च ने इसे कहीं ज्यादा खतरनाक साबित कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी धीरे-धीरे लिवर को अंदर से नुकसान पहुंचा रही है और अधिकतर मरीजों को इसका अंदाजा तक नहीं होता। यही कारण है कि इसे “साइलेंट किलर” कहा जा रहा है, जो बिना लक्षण के शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
अप्रैल 2026 में प्रकाशित एक प्रमुख मेडिकल स्टडी के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हर चार में से एक व्यक्ति लिवर फाइब्रोसिस का शिकार हो सकता है। वहीं, हर 20 मरीजों में से एक को लिवर सिरोसिस का खतरा होता है। चिंताजनक बात यह है कि इन मरीजों में से अधिकांश को कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते, जिससे बीमारी का पता समय पर नहीं चल पाता।
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9000 से ज्यादा मरीजों पर आधारित रिसर्च
यह अध्ययन देशभर के 27 अस्पतालों और क्लीनिकों में किया गया, जिसमें 9000 से अधिक टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया। रिसर्च में सामने आया कि लगभग 26% मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस के संकेत पाए गए, जबकि 14% मामलों में यह स्थिति काफी गंभीर थी। करीब 5% मरीज ऐसे भी थे जो सिरोसिस के कगार पर पहुंच चुके थे।
बिना फैटी लिवर वाले मरीज भी जोखिम में
इस स्टडी का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि लिवर डैमेज केवल फैटी लिवर वाले मरीजों तक सीमित नहीं है। जिन लोगों में फैटी लिवर के कोई संकेत नहीं थे, उनमें भी लगभग 13% मरीजों में फाइब्रोसिस पाया गया। इनमें से 4% मरीज सिरोसिस के उच्च जोखिम वाले वर्ग में शामिल थे। इससे यह साफ हो जाता है कि डायबिटीज अपने आप में लिवर के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
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कैसे होता है लिवर डैमेज?

डायबिटीज के कारण शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है, जिससे लिवर में फैट जमा होने लगता है। यह स्थिति आगे चलकर नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) का रूप ले सकती है। समय के साथ यह सूजन और टिश्यू सख्त होने की स्थिति (फाइब्रोसिस) में बदल जाती है, जो आगे चलकर सिरोसिस और लिवर फेलियर का कारण बन सकती है।
क्यों नहीं दिखते शुरुआती लक्षण?
लिवर की बीमारी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण नजर नहीं आते। सामान्य ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड में भी यह आसानी से पकड़ में नहीं आती। जब तक पीलिया, पेट में दर्द या सूजन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक लिवर को काफी नुकसान हो चुका होता है। यही कारण है कि इसे “छिपा हुआ खतरा” कहा जाता है।
डॉक्टरों की सलाह: समय पर जांच जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज मरीजों को सिर्फ शुगर लेवल पर ध्यान देने की बजाय अपने लिवर की भी नियमित जांच करानी चाहिए। साल में कम से कम एक बार लिवर फंक्शन टेस्ट और जरूरत पड़ने पर फाइब्रोस्कैन करवाना जरूरी है। इससे बीमारी का पता शुरुआती अवस्था में लगाया जा सकता है।
बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
लिवर को सुरक्षित रखने के लिए डायबिटीज मरीजों को अपनी जीवनशैली में बदलाव करना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। इसके अलावा, शराब और जंक फूड से दूरी बनाना भी लिवर हेल्थ के लिए फायदेमंद है।
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सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
यह स्टडी साफ तौर पर संकेत देती है कि टाइप-2 डायबिटीज केवल शुगर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। ऐसे में जागरूकता और नियमित जांच ही इस “साइलेंट खतरे” से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
डायबिटीज और लिवर से जुड़े अहम सवाल-जवाब (FAQs)
Q1. क्या टाइप-2 डायबिटीज से लिवर को नुकसान हो सकता है?
हाँ, टाइप-2 डायबिटीज लिवर में फैट जमा होने, सूजन और फाइब्रोसिस जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है, जो आगे चलकर सिरोसिस का कारण बन सकती हैं।
Q2. लिवर डैमेज के शुरुआती लक्षण क्यों नहीं दिखते?
लिवर की बीमारियां शुरुआती चरण में बिना लक्षण के होती हैं। जब तक लक्षण जैसे पीलिया या पेट दर्द दिखाई देते हैं, तब तक नुकसान काफी बढ़ चुका होता है।
Q3. क्या बिना फैटी लिवर के भी डायबिटीज मरीजों को खतरा है?
हाँ, स्टडी के अनुसार जिन मरीजों में फैटी लिवर नहीं था, उनमें भी लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस का जोखिम पाया गया है।
Q4. डायबिटीज मरीजों को लिवर की जांच कब करानी चाहिए?
डॉक्टरों के अनुसार, हर डायबिटीज मरीज को साल में कम से कम एक बार लिवर फंक्शन टेस्ट और जरूरत पड़ने पर फाइब्रोस्कैन कराना चाहिए।
Q5. लिवर को सुरक्षित रखने के लिए क्या करना चाहिए?
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और शराब से दूरी बनाकर लिवर को स्वस्थ रखा जा सकता है।

तानिया, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक अनुभवी लेखिका हैं, जिन्हें हेल्थ और बिजनेस विषयों पर 4 वर्षों का अनुभव है। स्वास्थ्य और बिजनेस से जुड़ी सटीक व भरोसेमंद जानकारी साझा करती हैं और वर्तमान में Hind 24 के लिए कार्यरत हैं।






