
33 हजार रुपये के बजट में बनी हॉरर फिल्म ‘मन पिशाच’ का ट्रेलर | Image Video Grab
Man Pishach Trailer 2026: कल्ट हॉरर-फैंटेसी फिल्म Tumbbad से पहचान बनाने वाले निर्देशक राही अनिल बर्वे एक बार फिर अपने नए प्रयोग के साथ दर्शकों के सामने आने वाले हैं। उनकी नई फिल्म Man Pishach का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया और सिनेमा प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
लगभग 1 मिनट 40 सेकंड के इस ट्रेलर में रहस्य, डर और मनोवैज्ञानिक तनाव का ऐसा माहौल दिखाया गया है, जो दर्शकों को तुरंत अपनी ओर खींच लेता है। खास बात यह है कि यह फिल्म पारंपरिक बड़े बजट की बजाय बेहद सीमित संसाधनों के साथ बनाई गई है और इसे सीधे YouTube पर रिलीज किया जा रहा है।
33 हजार रुपये के बजट में बना अनोखा प्रयोग
फिल्म Man Pishach को मेकर्स ‘जीरो-बजट’ प्रयोग कह रहे हैं, लेकिन इसके निर्माण में लगभग 33 हजार रुपये की लागत आई है। आम तौर पर फिल्मों का बजट लाखों या करोड़ों में होता है, ऐसे में इतनी कम लागत में एक पूर्ण फिल्म तैयार करना अपने आप में बड़ा प्रयोग माना जा रहा है। निर्देशक का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य यह दिखाना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद भी क्रिएटिव सोच और तकनीक की मदद से प्रभावशाली फिल्म बनाई जा सकती है।
AI टूल्स और iPhone से की गई शूटिंग
इस फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसे पारंपरिक फिल्म निर्माण तकनीक के बजाय आधुनिक डिजिटल टूल्स की मदद से बनाया गया है। फिल्म में कई हिस्सों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI टूल्स की सहायता से तैयार किया गया है, जबकि कुछ फुटेज iPhone से शूट किए गए हैं। इसके अलावा फोटोशॉप, जनरेटिव AI टूल्स और एडोबी आफ्टर इफेक्ट्स जैसे सॉफ्टवेयर का उपयोग कर विजुअल्स को तैयार किया गया। इस तकनीकी प्रयोग के कारण फिल्म का विजुअल टोन और कलर पैलेट दर्शकों को Tumbbad की याद भी दिलाता है।
YouTube पर 18 मार्च को होगा प्रीमियर
फिल्म Man Pishach का रनटाइम करीब 80 मिनट है और इसे 18 मार्च को सीधे YouTube पर प्रीमियर किया जाएगा। आज के समय में जहां अधिकांश फिल्में सिनेमाघरों या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होती हैं, वहीं इस फिल्म का सीधे YouTube पर आना इसे और भी दिलचस्प बनाता है। निर्देशक का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए छोटे बजट की फिल्मों को भी वैश्विक दर्शक मिल सकते हैं।
पौराणिक मिथकों और मनोवैज्ञानिक डर का मेल
ट्रेलर देखने के बाद यह साफ हो जाता है कि फिल्म की कहानी सिर्फ डर पैदा करने तक सीमित नहीं है। इसमें पौराणिक कथाओं, स्थानीय मिथकों और इंसानी मन के अंधेरे पहलुओं को एक साथ जोड़ा गया है। कहानी में दबे-छिपे डर, रहस्य और मानसिक संघर्ष को प्रमुखता दी गई है। यही वजह है कि फिल्म को पारंपरिक हॉरर के बजाय साइकोलॉजिकल फोक हॉरर शैली में रखा गया है।
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रहस्यमयी गांव और पहाड़ी गुंबद की कहानी
फिल्म की कहानी सदाशिव राव नाम के एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो आर्कियोलॉजी विभाग में जूनियर अधिकारी के रूप में काम करता है। मॉनसून के दौरान एक पहाड़ी के ढह जाने के बाद उसे जांच के लिए दूरदराज के हदमगांव इलाके में भेजा जाता है। वहां उसे पहाड़ी के नीचे एक रहस्यमयी पत्थर का गुंबद दिखाई देता है। इसी दौरान वह गांव में रहने वाली एक युवा विधवा सावित्री के घर ठहरता है। धीरे-धीरे उसे गांव में कई अजीब पैटर्न दिखाई देने लगते हैं, जिससे कहानी रहस्य और भय की दिशा में आगे बढ़ती है।
गांव का रहस्य और अजीब नियम
सदाशिव को यह देखकर हैरानी होती है कि गांव में सूरज ढलने से पहले ही सभी घरों के दरवाजे बंद हो जाते हैं और अंधेरा होते ही सड़कें पूरी तरह सुनसान हो जाती हैं। गांव के लोग पहाड़ी और गुंबद से जुड़े सवालों पर चुप्पी साध लेते हैं। जैसे-जैसे वह अपनी जांच आगे बढ़ाता है, वैसे-वैसे उसे न सिर्फ उस रहस्यमयी ढांचे बल्कि गांव के लोगों के बारे में भी कई चौंकाने वाली सच्चाइयों का पता चलता है।
फिल्म में सिर्फ दो कलाकार
इस फिल्म की कास्ट भी उतनी ही अनोखी है जितना इसका निर्माण तरीका। फिल्म में केवल दो कलाकार नजर आएंगे यानीया भारद्वाज और दीपक दामले। सीमित कलाकारों के साथ बनाई गई यह फिल्म पूरी तरह वातावरण, विजुअल्स और कहानी के मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर निर्भर करती है। मेकर्स के अनुसार फिल्म में संवाद कम हैं और कहानी को विजुअल्स, सन्नाटे और वॉइस नैरेशन के जरिए आगे बढ़ाया गया है।
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60 पन्नों की स्क्रिप्ट और चार महीने की मेहनत
फिल्म की स्क्रिप्ट करीब 60 पन्नों की है, जिसे जाई गुलमोहर ने तैयार किया है। इसे खास तौर पर AI आधारित फिल्म निर्माण की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए लिखा गया। निर्देशक के मुताबिक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में करीब चार महीने का समय लगा। हर सीन को डिजिटल रूप से तैयार करने से पहले कागज पर उसका स्केच बनाया जाता था और फिर उसी के आधार पर विजुअल तैयार किए जाते थे।
फिल्म निर्माण के लिए प्रेरणा बन सकता है यह प्रयोग
निर्देशक राही अनिल बर्वे का कहना है कि यह फिल्म एक रचनात्मक प्रयोग है। उनका मानना है कि अगर यह प्रोजेक्ट किसी ऐसे कलाकार को प्रेरित कर सके जो आर्थिक तंगी या संसाधनों की कमी से जूझ रहा हो, तो यही इसकी सबसे बड़ी सफलता होगी। उनका संदेश साफ है कि सीमित साधनों के बावजूद भी रचनात्मकता और तकनीक की मदद से नया सिनेमा बनाया जा सकता है।

तानिया, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक अनुभवी लेखिका हैं। जिन्हें क्रिकेट, फिल्में, मूवी रिव्यू, ट्रेंडिंग खबरें, लाइफस्टाइल और बिजनेस जैसे विषयों पर कंटेंट लिखने का 4 वर्षों का अनुभव है। वह Hind 24 के लिए काम कर रही हैं।


