UPSC Success Story: मेहनत ने बदली किस्मत, रिक्शा चालक का बेटा बना IAS

IAS अधिकारी गोविंद जायसवाल की यह प्रेरणादायक UPSC Success Story बताती है कि कठिन परिस्थितियों और गरीबी के बावजूद पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की जा सकती है।
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UPSC Success Story: उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले गोविंद जायसवाल की कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले गोविंद ने अपने कठिन संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल UPSC को पहले ही प्रयास में पास कर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। उनकी सफलता यह साबित करती है कि मजबूत इरादों के सामने गरीबी और मुश्किलें ज्यादा समय तक टिक नहीं पातीं।

रेलवे स्टेशन के पास छोटे कमरे में बीता बचपन

गोविंद जायसवाल का जन्म वाराणसी के एक गरीब परिवार में हुआ था। उनका परिवार रेलवे स्टेशन के पास एक छोटे से कमरे में रहता था। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी और कई बार घर में बिजली तक नहीं रहती थी। बचपन में ही उनकी मां का निधन हो गया था, जिसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके पिता के कंधों पर आ गई। उनके पिता रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च चलाते थे और सीमित आमदनी में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की कोशिश करते रहे।

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गरीबी के तानों ने जगाया बड़ा सपना

गोविंद को बचपन से ही गरीबी की वजह से कई तरह के अपमान और भेदभाव का सामना करना पड़ा। एक घटना ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। बताया जाता है कि एक बार उन्हें उनके अमीर दोस्त के घर से केवल गरीब होने के कारण बाहर निकाल दिया गया था। इस घटना ने गोविंद को भीतर तक झकझोर दिया और उसी दिन उन्होंने तय कर लिया कि वे बड़े अधिकारी बनकर समाज में अपनी पहचान बनाएंगे। यहीं से उनके IAS बनने के सपने की शुरुआत हुई।

बेटे के सपनों के लिए पिता ने किया बड़ा त्याग

गोविंद के पिता ने बेटे की पढ़ाई और सपनों को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। उन्होंने बेटे को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए अपनी जमीन तक बेच दी और कई रिक्शे भी बेचने पड़े। आर्थिक संकट के बावजूद उन्होंने गोविंद की पढ़ाई कभी रुकने नहीं दी। पिता का यह त्याग और भरोसा ही गोविंद की सबसे बड़ी प्रेरणा बना। परिवार की मुश्किलों ने उन्हें कमजोर करने के बजाय और ज्यादा मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

दिल्ली में संघर्ष के बीच जारी रखी तैयारी

UPSC की तैयारी के लिए गोविंद दिल्ली पहुंचे, जहां आर्थिक तंगी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने बच्चों को गणित पढ़ाकर अपना खर्च निकाला। इसके साथ ही लाइब्रेरी में घंटों बैठकर पढ़ाई करते रहे। उन्होंने हिंदी माध्यम से तैयारी की और कभी भी अपनी भाषा को कमजोरी नहीं बनने दिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका आत्मविश्वास लगातार मजबूत होता गया।

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पहले ही प्रयास में हासिल की बड़ी सफलता

साल 2006 में केवल 22 वर्ष की उम्र में गोविंद जायसवाल ने UPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर इतिहास रच दिया। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 48 हासिल की और IAS अधिकारी बने। उनकी इस उपलब्धि ने देशभर के युवाओं को यह संदेश दिया कि सफलता पाने के लिए महंगे संसाधन नहीं बल्कि मेहनत, अनुशासन और मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होती है।

हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए बने प्रेरणा

गोविंद जायसवाल का मानना है कि भाषा कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। उन्होंने हमेशा कहा कि आत्मविश्वास और अपने विचारों को सही तरीके से व्यक्त करने की क्षमता ही असली ताकत होती है। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बावजूद उन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। यही वजह है कि आज उनकी कहानी हिंदी माध्यम से तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

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