चीन की ‘नताशा डॉल’ ने मचाया दुनिया भर में बवाल, वीडियो देखकर रह जाएंगे हैरान

Natasha Doll News: चीन की ‘नताशा डॉल’ इन दिनों सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद बन गई है। स्ट्रेस रिलीफ टॉय के रूप में शुरू हुआ यह ट्रेंड अब वायरल वीडियो, नस्लवाद के आरोपों और हिंसक कंटेंट को लेकर वैश्विक बहस का कारण बन चुका है।
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Natasha Doll Controversy: चीन में बनी एक छोटी सी स्क्वीज टॉय डॉल ‘नताशा डॉल’ आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गई है। शुरुआत में यह सिर्फ एक स्ट्रेस रिलीफ खिलौना थी, लेकिन सोशल मीडिया पर इसके वायरल वीडियो ने इसे एक बड़े विवाद में बदल दिया है। सांवले रंग की इस डॉल को लेकर कई देशों में आलोचना तेज हो गई है और इसे संवेदनशील सामाजिक मुद्दों से जोड़कर देखा जा रहा है।

पूरा वीडियो देखें 👇

कैसे बना यह ट्रेंड सोशल मीडिया का विवाद

यह डॉल चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे रेडनोट और डॉयिन पर तेजी से वायरल हुई। कंटेंट क्रिएटर्स इस टॉय के साथ ऐसे वीडियो बनाने लगे जिनमें इसे दबाना, खींचना, पीटना और पैरों से कुचलना जैसी हरकतें दिखाई गईं। धीरे-धीरे ये वीडियो सिर्फ चीन तक सीमित नहीं रहे और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैल गए। इसके बाद इस ट्रेंड को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे कि क्या यह सिर्फ मनोरंजन है या फिर इसके पीछे कोई संवेदनशील और आपत्तिजनक संदेश भी छिपा है।

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नाम ‘नताशा’ कैसे पड़ा, जानिए कहानी

इस डॉल के नाम ‘नताशा’ के पीछे एक दिलचस्प कहानी बताई जाती है। एक चीनी व्लॉगर ने मजाक-मजाक में इस खिलौने को अपनी “बेटी” जैसा बताना शुरू किया और इसी दौरान इसे ‘नताशा’ नाम मिल गया। लेकिन जब यही डॉल वायरल कंटेंट का हिस्सा बनी, तो इसका इस्तेमाल जिस तरह से किया जाने लगा, उसने पूरी कहानी का रुख बदल दिया और यह नाम अब एक बड़े विवाद से जुड़ गया है।

नस्लवाद और हिंसा के आरोपों से घिरा ट्रेंड

जैसे-जैसे इस डॉल के वीडियो वायरल हुए, वैसे-वैसे सोशल मीडिया पर आलोचना भी बढ़ती गई। कई लोगों का कहना है कि इन वीडियो में किसी खास रंग की डॉल को बार-बार हिंसा के साथ दिखाना बेहद आपत्तिजनक है और इससे नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा मिल सकता है। ब्लैक समुदाय के लोगों सहित कई सामाजिक संगठनों ने भी इस ट्रेंड पर नाराजगी जताई है और इसे गलत संदेश देने वाला बताया है।

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विशेषज्ञों और प्रोफेशनल्स की चिंता

इस पूरे मामले पर सिर्फ आम लोग ही नहीं बल्कि वकील और मेडिकल एक्सपर्ट्स भी चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसे ट्रेंड यह दिखाते हैं कि कंटेंट मॉडरेशन की जरूरत अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। यह मामला अब सिर्फ एक खिलौने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और सोशल मीडिया के प्रभाव पर एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है।

इस वीडियो से जुड़े सभी तथ्य और दावे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर वायरल पोस्ट्स और अलग-अलग ऑनलाइन रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। इसमें व्यक्त किए गए विचार और प्रतिक्रियाएं संबंधित यूजर्स और क्रिएटर्स की निजी राय हैं, जिनसे हमारी न्यूज़ टीम सहमत हो भी सकती है और नहीं भी।

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