
दोबारा गर्म किया गया तेल लिवर के लिए बन सकता है जहर | (Picture Courtesy: Freepik)
Liver Damage: भारतीय रसोई में सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे तेलों का इस्तेमाल आम बात है। तड़के से लेकर डीप फ्राई तक, ये तेल हमारी हर प्लेट का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन अब यही रोज़मर्रा की आदत धीरे-धीरे हमारे शरीर के सबसे ज़रूरी अंग लिवर – के लिए खतरे की घंटी बनती जा रही है।
हालिया रिसर्च और हेल्थ एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन तेलों का अत्यधिक और गलत तरीके से इस्तेमाल लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों जैसे फैटी लिवर डिजीज, लिवर इंफ्लेमेशन और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का कारण बन सकता है। समस्या तेल से ज़्यादा, उसके इस्तेमाल के तरीके में छिपी हुई है।
क्या होते हैं सीड ऑयल्स?

सीड ऑयल्स वे तेल होते हैं जो पौधों के बीजों से निकाले जाते हैं, जैसे, सरसों का तेल, सूरजमुखी तेल, मूंगफली तेल, सोयाबीन तेल। इनमें ओमेगा-6 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। ओमेगा-6 शरीर के लिए जरूरी होता है, लेकिन जब इसकी मात्रा डाइट में जरूरत से ज्यादा हो जाए और ओमेगा-3 की मात्रा कम हो जाए, तब शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ने लगती है। यही सूजन आगे चलकर मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर जैसी बीमारियों की नींव बनती है।
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लिवर पर कैसे पड़ता है असर?

लिवर शरीर का सबसे बड़ा डिटॉक्सिफायर है। यह फैट को मेटाबोलाइज करता है, कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है और खून को साफ रखने में अहम भूमिका निभाता है। जब हम रोज़ाना अधिक मात्रा में रिफाइंड सीड ऑयल, डीप फ्राई फूड और प्रोसेस्ड खाना खाते हैं, तो लिवर के सेल्स में धीरे-धीरे फैट जमा होने लगता है।
यही फैट आगे चलकर नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) का रूप ले लेता है, जो आगे जाकर लिवर सिरोसिस और लिवर फेल्योर तक का खतरा बढ़ा सकता है।
बार-बार गर्म किया गया तेल: सबसे बड़ा ज़हर

भारतीय किचन की एक बेहद आम आदत है, बचे हुए तेल को दोबारा गर्म करके इस्तेमाल करना। यही आदत सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है। तेल को बार-बार तेज तापमान पर गर्म करने से उसमें एल्डिहाइड, ऑक्सीडाइज्ड फैट्स और कई तरह के जहरीले केमिकल कंपाउंड बन जाते हैं।
ये तत्व सीधे लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और उसकी डिटॉक्स करने की क्षमता को कमजोर कर देते हैं। स्ट्रीट फूड, समोसे, पकौड़े, चिप्स और डीप फ्राइड स्नैक्स में अक्सर रीयूज्ड ऑयल का इस्तेमाल होता है, जो लिवर में सूजन, हार्मोनल असंतुलन और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर को जन्म देता है।
ओमेगा-6 बनाम ओमेगा-3 असंतुलन
आज की डाइट में ओमेगा-6 की मात्रा बहुत ज्यादा और ओमेगा-3 की मात्रा बेहद कम हो गई है। यही असंतुलन शरीर में क्रॉनिक इंफ्लेमेशन पैदा करता है। यह इंफ्लेमेशन मोटापा, डायबिटीज़, हार्ट डिजीज़ और फैटी लिवर जैसी बीमारियों से सीधे जुड़ा हुआ है।
क्या आपको तेल बदलना चाहिए?
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आप सरसों या मूंगफली का तेल पूरी तरह छोड़ दें। असली समस्या है-
- तेल की मात्रा ज्यादा होना
- बार-बार तेल को गर्म करना
- रिफाइंड ऑयल का ज्यादा इस्तेमाल
- तला-भुना और जंक फूड
समाधान क्या है?
- कोल्ड-प्रेस्ड तेल का सीमित इस्तेमाल करें
- तेल को दोबारा गर्म न करें
- डीप फ्राई खाने से बचें
- ओमेगा-3 युक्त चीजें (अलसी, अखरोट, मछली) डाइट में शामिल करें
- घर का ताजा बना खाना प्राथमिकता बनाएं

तानिया, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक अनुभवी लेखिका हैं। जिन्हें क्रिकेट, फिल्में, मूवी रिव्यू, ट्रेंडिंग खबरें, लाइफस्टाइल और बिजनेस जैसे विषयों पर कंटेंट लिखने का 4 वर्षों का अनुभव है। वह Hind 24 के लिए काम कर रही हैं।


