
Aspirants Season 3 में प्रशासनिक जिम्मेदारियों और दोस्ती के टकराव को दिखाया गया है
Aspirants 3 Review: TVF की लोकप्रिय वेब सीरीज Aspirants अपने तीसरे सीजन के साथ एक बार फिर दर्शकों के बीच लौट आई है। इस बार कहानी सिर्फ UPSC की तैयारी तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा पास करने के बाद की असली चुनौतियों को भी सामने लाती है। यह सीजन बताता है कि एक अधिकारी बनने के बाद जिम्मेदारियां किस तरह बढ़ जाती हैं और निजी रिश्ते किस तरह सिस्टम की सख्ती से टकराने लगते हैं।
पंचायत, गुल्लक और कोटा फैक्ट्री जैसी चर्चित वेब सीरीज बनाने वाली TVF ने इस बार भी युवाओं के पसंदीदा विषय-UPSC और दोस्ती-को बेहद संवेदनशील और वास्तविक अंदाज में पेश किया है। यही कारण है कि Aspirants का तीसरा सीजन भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
ट्राईपॉड की कहानी में नया मोड़
सीरीज की कहानी अभिलाष शर्मा (नवीन कस्तूरिया), संदीप भैया (सनी हिंदुजा), एसके सर (अभिलाष थपलियाल), गुरी (शिवांकित सिंह परिहार) और धैर्य (नमिता दुबे) जैसे किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है। पहले के सीजनों में जहां इन दोस्तों की जिंदगी मुखर्जी नगर की गलियों और UPSC की तैयारी तक सीमित थी, वहीं तीसरे सीजन में कहानी उससे आगे बढ़ चुकी है।
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अब दर्शकों को दिखाया जाता है कि एक IAS अधिकारी के सामने प्रशासनिक फैसलों, राजनीतिक दबाव और व्यक्तिगत रिश्तों के बीच संतुलन बनाना कितना कठिन होता है। दोस्ती, भरोसा और जिम्मेदारियों के बीच का यह संघर्ष ही इस सीजन की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है।
सत्ता और रिश्तों के बीच टकराव

इस सीजन की कहानी में सत्ता और सिस्टम के साथ-साथ रिश्तों की जटिलता को भी गहराई से दिखाया गया है। कहानी का मुख्य केंद्र अभिलाष शर्मा और संदीप भैया के बीच का टकराव है, जो धीरे-धीरे एक बड़े विवाद का रूप ले लेता है।
रामपुर के जिला मजिस्ट्रेट बने अभिलाष पर आरोप लगता है कि उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में अपने दोस्त गुरी को फायदा पहुंचाने की कोशिश की। यह आरोप संदीप की ओर से लगाया जाता है, जिसके बाद मामले की जांच के लिए कमेटी बैठती है। यहां से कहानी में तनाव और सस्पेंस बढ़ जाता है क्योंकि अभिलाष को अपनी ईमानदारी साबित करनी होती है।
अतीत और वर्तमान का दिलचस्प मेल
सीरीज की खास बात यह है कि इसमें वर्तमान की कहानी के साथ-साथ अतीत की झलक भी दिखाई जाती है। मुखर्जी नगर में शुरू हुई दोस्ती अब कई मोड़ों से गुजर चुकी है और परिस्थितियों ने इन दोस्तों के रिश्तों को काफी बदल दिया है।
सीरीज में एक संवाद बेहद प्रभावशाली है –
“पोस्टिंग मिलती है सिस्टम से… लेकिन रिश्तों का रिजल्ट मिलता है वक्त से।”
यह लाइन पूरे सीजन के भाव को दर्शाती है। कहानी दिखाती है कि कैसे समय और परिस्थितियां सबसे मजबूत रिश्तों की भी परीक्षा ले लेती हैं।
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कहानी में नया किरदार और बढ़ता तनाव
तीसरे सीजन में कहानी तब और दिलचस्प हो जाती है जब मुखर्जी नगर के अतीत से जुड़ा एक किरदार-पवन कुमार-अभिलाष की जिंदगी में फिर से सामने आता है। यह किरदार अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए अभिलाष से सीधे टकराने को तैयार दिखाई देता है।
इस नए संघर्ष से कहानी में नया ड्रामा जुड़ जाता है। इसके साथ ही अभिलाष और दीपा की लव स्टोरी भी इस सीजन में दिखाई जाती है, जो कहानी को भावनात्मक स्पर्श देती है।
क्लाइमैक्स ने बटोर लिए पूरे नंबर
सीरीज का सबसे मजबूत हिस्सा इसका क्लाइमैक्स है। आखिरी एपिसोड में कहानी जिस भावनात्मक मोड़ पर पहुंचती है, वह दर्शकों को गहराई से प्रभावित करती है। कई ऐसे पल आते हैं जो भावनात्मक रूप से काफी प्रभावशाली हैं और दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं।
क्लाइमैक्स इतना असरदार है कि यह साफ संकेत देता है कि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है और आने वाले समय में इसका अगला सीजन भी देखने को मिल सकता है।
कहां थोड़ी कमजोर पड़ती है कहानी
हालांकि, तीसरे सीजन में कहानी काफी मजबूत है, लेकिन कुछ जगहों पर इसकी रफ्तार थोड़ी असंतुलित लगती है। खासतौर पर अभिलाष और दीपा के रिश्ते को जिस तेजी से आगे बढ़ाया गया है, वह थोड़ा जल्दबाजी भरा महसूस होता है।
दर्शकों को उनके रिश्ते के भावनात्मक पहलू से पूरी तरह जुड़ने का मौका कम मिलता है, जो इस सीजन की एक छोटी कमी कही जा सकती है।
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कलाकारों की दमदार परफॉर्मेंस
अभिनय की बात करें तो इस सीजन में सभी कलाकारों ने बेहतरीन काम किया है। नवीन कस्तूरिया ने अभिलाष शर्मा के किरदार में गंभीरता और परिपक्वता का शानदार संतुलन दिखाया है। उनका अभिनय इस सीजन की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है।
सनी हिंदुजा ने संदीप भैया के किरदार को भावनात्मक गहराई दी है, जिससे उनका किरदार और भी प्रभावशाली बन जाता है। इसके अलावा नमिता दुबे, अभिलाष थपलियाल और शिवांकित सिंह परिहार ने भी अपने किरदारों को पूरी ईमानदारी से निभाया है।
निर्देशन और लेखन की खासियत
इस सीजन का निर्देशन दीपेश सुमित्रा जगदीश ने किया है और उन्होंने ही इसकी कहानी भी लिखी है। उन्होंने सीरीज में पुराने और नए ट्रैक को बेहद संतुलित तरीके से जोड़ा है। यही वजह है कि कहानी कहीं भी बिखरी हुई महसूस नहीं होती।
गौरतलब है कि Aspirants का पहला सीजन अप्रैल 2021 में रिलीज हुआ था, जबकि दूसरा सीजन अक्टूबर 2023 में आया था। दोनों ही सीजनों को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। अब तीसरा सीजन भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाता नजर आ रहा है।

तानिया, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक अनुभवी लेखिका हैं। जिन्हें क्रिकेट, फिल्में, मूवी रिव्यू, ट्रेंडिंग खबरें, लाइफस्टाइल और बिजनेस जैसे विषयों पर कंटेंट लिखने का 4 वर्षों का अनुभव है। वह Hind 24 के लिए काम कर रही हैं।


