Petro Diesel Price: पड़ोसी देशों में 128% तक उछले दाम, भारत में राहत कब तक बरकरार?

Petro Diesel Price Shock: ईरान युद्ध के बाद दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जबकि भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। जानिए इसकी वजह, वैश्विक असर और आगे क्या हो सकता है।
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Petro Diesel Price Update: ईरान युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है, जिसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ा है। दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतें अचानक बढ़ गई हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर भारी दबाव बना है। खासतौर पर एशियाई और विकासशील देशों में यह असर ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल के दामों में भारी उछाल

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, म्यांमार, फिलीपींस, मलेशिया और पाकिस्तान जैसे देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। म्यांमार में पेट्रोल की कीमतें करीब 93.9% तक बढ़ गई हैं, जबकि डीजल में 128.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं लाओस और वियतनाम जैसे देशों में डीजल की कीमतें 140% से भी अधिक बढ़ चुकी हैं, जो वैश्विक संकट की गंभीरता को दर्शाता है।

भारत में स्थिर कीमतें: एक अलग स्थिति

दुनिया के कई देशों में बढ़ती कीमतों के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। यह स्थिति भारत को अन्य देशों से अलग बनाती है। जबकि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसके बावजूद यहां आम उपभोक्ताओं पर तुरंत असर नहीं दिख रहा है।

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भारत की तेल निर्भरता और संवेदनशीलता

भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में किसी भी तरह की तेजी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हालांकि, यह असर आम जनता तक तुरंत नहीं पहुंचता, लेकिन तेल कंपनियों और सरकारी खजाने पर इसका दबाव बढ़ जाता है।

सरकारी नियंत्रण से मिल रही अस्थायी राहत

सरकारी नियंत्रण से मिल रही अस्थायी राहत

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पूरी तरह बाजार आधारित नहीं हैं। सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां (PSUs) अंतरराष्ट्रीय कीमतों के असर को तुरंत उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचातीं। कई बार कंपनियां घाटा सहकर कीमतों को स्थिर बनाए रखती हैं, जबकि सरकार टैक्स में कटौती करके राहत देने की कोशिश करती है। इसके पीछे महंगाई नियंत्रण और राजनीतिक संतुलन जैसे कारण भी अहम भूमिका निभाते हैं।

कब तक बनी रहेगी कीमतों में स्थिरता?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह राहत लंबे समय तक नहीं रह सकती। यदि ब्रेंट क्रूड की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों का घाटा लगातार बढ़ेगा। ऐसी स्थिति में सरकार के पास दो ही विकल्प बचते हैं या तो टैक्स में और कटौती की जाए या फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की जाए।

आने वाले समय में बढ़ सकता है आम जनता पर दबाव

अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत में भी जल्द ही पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में आम जनता को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

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राहत फिलहाल, लेकिन खतरा बरकरार

फिलहाल भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता राहत जरूर दे रही है, लेकिन यह स्थिति अस्थायी है। वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करते हुए आने वाले समय में कीमतों में बदलाव तय माना जा रहा है। इसलिए सरकार और उपभोक्ताओं दोनों को आने वाले संभावित बदलावों के लिए तैयार रहना होगा।

वैश्विक देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी

देशपेट्रोल बढ़ोतरी (%)डीजल बढ़ोतरी (%)
म्यांमार93.9%128.5%
फिलीपींस68.7%128.0%
मलेशिया52.4%101.3%
कंबोडिया49.4%118.7%
पाकिस्तान46.6%88.7%
लाओस45.6%169.5%
जिम्बाब्वे42.9%
यूएई40.8%86.1%
वियतनाम39.0%141.8%
पनामा38.5%
लेबनान76.7%
न्यूज़ीलैंड76.3%
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