March 29, 2026
चंद्र ग्रहण 2026

3 मार्च 2026 को लगने वाला साल का सबसे लंबा पूर्ण चंद्र ग्रहण।

Astrology News: साल 2026 के सबसे लंबे चंद्र ग्रहण का समय, भारत में इसकी दृश्यता और सूतक काल की सावधानियों पर आधारित एक संपूर्ण गाइड।

Chandra Grahan 2026: विज्ञान की दृष्टि में चंद्र ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इस स्थिति में पृथ्वी की विशाल छाया चंद्रमा को पूरी तरह या आंशिक रूप से ढंक लेती है। साल 2026 का आगाज़ एक ऐसी ही बड़ी घटना से होने जा रहा है।

3 मार्च, मंगलवार को लगने वाला यह ग्रहण न केवल साल का पहला ग्रहण होगा, बल्कि इसे हाल के वर्षों का सबसे लंबी अवधि वाला चंद्र ग्रहण भी माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दौरान चंद्रमा ‘सिंह’ राशि में विराजमान होंगे, जिससे विभिन्न राशियों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।

भारत में दृश्यता और समय का गणित

भारत में दृश्यता और समय का गणित

भारतीय समयानुसार, यह चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण की सबसे प्रभावशाली अवस्था, जिसे ‘खग्रास’ या पूर्ण चंद्र ग्रहण कहा जाता है, शाम 4 बजकर 34 मिनट पर शुरू होगी। हालांकि, भारत में ग्रहण की दृश्यता सीमित रहेगी।

यहाँ चंद्रोदय शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा, जिसके कारण देशवासियों को इस खगोलीय घटना का दीदार केवल अंतिम 25 मिनटों के लिए ही हो पाएगा। दिल्ली जैसे शहरों में भी शाम 6:22 के आसपास ही चंदा ग्रहण की अवस्था में उदय होगा।

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सूतक काल के कड़े नियम और सावधानी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले लग जाता है। इस गणना के आधार पर, 3 मार्च की सुबह 6 बजकर 20 मिनट से ही सूतक प्रभावी हो जाएगा। सूतक काल को एक “अशुद्ध” समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और मूर्तियों को स्पर्श करना वर्जित होता है। इस अवधि में भोजन बनाने, खाने, और यहाँ तक कि बाल या नाखून काटने जैसे सामान्य कार्यों को भी अशुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, सूतक लगने के बाद केवल ईश्वर का ध्यान ही फलदायी होता है।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?

ग्रहण काल को आध्यात्मिक ऊर्जा संचय करने का सबसे उत्तम समय माना जाता है। इस समय “ॐ सोमाय नमः” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और सुरक्षा मिलती है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे इस दौरान घर से बाहर न निकलें और सुई, चाकू या कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग बिल्कुल न करें। ग्रहण की नकारात्मकता से बचने के लिए पुराने खान-पान की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते या कुश डालना एक प्राचीन और वैज्ञानिक परंपरा है।

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शुद्धिकरण और दान का महत्व

शाम 6 बजकर 47 मिनट पर ग्रहण समाप्त होते ही पूरे घर का शुद्धिकरण करना आवश्यक है। परंपरा के अनुसार, ग्रहण के बाद गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए और घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करना चाहिए। इसके बाद सफेद वस्तुओं जैसे चावल, चीनी, दूध, सफेद वस्त्र या चांदी का दान करना कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को मजबूत करता है। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के बाद किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य फल प्रदान करता है।

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