PM Fasal Bima Yojana: देशभर में मौसम लगातार करवट बदल रहा है। कहीं तेज आंधी किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रही है तो कहीं समय से पहले बारिश खेती के लिए चुनौती बन रही है। इसके अलावा अल नीनो और ला नीना जैसे मौसमीय प्रभावों को लेकर भी आशंकाएं बनी हुई हैं। ऐसे हालात में किसानों के सामने अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इसी चिंता के बीच केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PM Fasal Bima Yojana) किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर सामने आई है।
कई राज्यों में असामान्य मौसम का असर
पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का अलग-अलग प्रभाव देखने को मिला है। राजस्थान के कई जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। दूसरी ओर महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे असंतुलित मौसम का सीधा असर खेती और किसानों की आय पर पड़ सकता है।
क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PM Fasal Bima Yojana)
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, मौसम संबंधी जोखिमों और अन्य कारणों से होने वाले फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। इस योजना के तहत किसान बेहद कम प्रीमियम देकर अपनी फसल का बीमा करा सकते हैं। यदि फसल को नुकसान होता है तो बीमा कंपनी की ओर से निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाता है। योजना में किसानों के प्रीमियम का बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारें वहन करती हैं।
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खरीफ फसलों के लिए केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम
योजना के तहत विभिन्न फसलों और मौसमों के लिए अलग-अलग प्रीमियम दरें निर्धारित की गई हैं। खरीफ फसलों के लिए किसानों को केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है। शेष प्रीमियम राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं। यही कारण है कि कम लागत में किसानों को बड़े स्तर की बीमा सुरक्षा उपलब्ध हो जाती है।
ऐसे करें प्रीमियम की गणना
किसान अपनी फसल के बीमा और प्रीमियम की जानकारी ऑनलाइन भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की आधिकारिक वेबसाइट (www.pmfby.gov.in) पर जाकर Insurance Premium Calculator का उपयोग करना होगा। यहां किसान सीजन, वर्ष, राज्य, जिला, फसल और भूमि का क्षेत्रफल दर्ज करके यह जान सकते हैं कि कुल बीमा राशि कितनी होगी, किसान का योगदान कितना रहेगा और सरकार कितनी सब्सिडी देगी।
उदाहरण से समझिए बीमा और प्रीमियम का गणित

मान लीजिए किसी किसान ने 5 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बोई है। यदि कुल प्रीमियम 15,920 रुपये निर्धारित होता है तो इसमें किसान और केंद्र सरकार का हिस्सा समान रूप से दिखाई दे सकता है। बीमा राशि लगभग 3.98 लाख रुपये तक हो सकती है। हालांकि वास्तविक भुगतान में राज्य सरकार की अतिरिक्त सब्सिडी मिलने के बाद किसान को बहुत कम राशि अपनी जेब से देनी पड़ती है। कई मामलों में यह राशि कुछ सौ रुपये तक सीमित रह सकती है।
किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को अतिरिक्त लाभ
योजना का एक बड़ा लाभ किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) धारकों को भी मिलता है। पात्र किसानों को कई स्थितियों में फसल बीमा का लाभ आसान प्रक्रिया के साथ उपलब्ध कराया जाता है। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होता है और बीमा सुरक्षा का दायरा बढ़ता है।
फसल बीमा क्लेम का स्टेटस कैसे जांचें
यदि किसी किसान ने बीमा क्लेम किया है तो वह ऑनलाइन अपने आवेदन की स्थिति भी देख सकता है। इसके लिए आधिकारिक पोर्टल (www.pmfby.gov.in) पर जाकर Application Status विकल्प चुनना होगा। इसके बाद पॉलिसी आईडी और आवश्यक विवरण दर्ज कर मोबाइल ओटीपी सत्यापन के माध्यम से क्लेम की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
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किन परिस्थितियों में मिलता है बीमा कवरेज
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PM Fasal Bima Yojana) के तहत किसानों को कई प्रकार की परिस्थितियों में सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसमें बुवाई या रोपाई में असफलता, खड़ी फसल को बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, तूफान, बाढ़, कीट एवं रोगों से होने वाला नुकसान शामिल है। इसके अलावा कटाई के बाद 14 दिनों तक प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को भी कवर किया जाता है। स्थानीय स्तर की आपदाएं जैसे जलभराव, बादल फटना, भूस्खलन और प्राकृतिक कारणों से लगी आग भी योजना के दायरे में आती हैं।
संकट के समय किसानों के लिए सुरक्षा कवच
मौसम की बढ़ती अनिश्चितता और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को देखते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PM Fasal Bima Yojana) किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो रही है। कम प्रीमियम और व्यापक कवरेज के कारण यह योजना खेती से जुड़े आर्थिक जोखिम को कम करने में मदद करती है। ऐसे समय में जब मौसम का अनुमान लगाना कठिन होता जा रहा है, फसल बीमा किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन बनकर उभर रहा है।

अजय सिंह, पिछले 4 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में हैं और प्रिंट व डिजिटल मीडिया का अनुभव रखते हैं। बिजनेस, वित्त, निवेश, बाजार ट्रेंड्स और सरकारी योजनाओं से जुड़ी खबरों पर खास पकड़ है। फिलहाल वह Hind 24 के लिए कार्यरत हैं।






