March 29, 2026
डॉलर के मुकाबले गिरता भारतीय रुपया ग्राफ

₹93 के पार पहुंचा रुपया, रिकॉर्ड निचले स्तर पर | Image Source - Groww

Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार ₹93 के पार गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। मिडिल ईस्ट तनाव, FIIs की भारी बिकवाली और महंगे कच्चे तेल ने भारतीय करेंसी पर जबरदस्त दबाव बना दिया है।

Rupee vs Dollar Today: भारतीय मुद्रा ने शुक्रवार, 20 मार्च को इतिहास का सबसे कमजोर स्तर छू लिया। शुरुआती कारोबार में रुपया 19 पैसे टूटकर 93.08 प्रति डॉलर तक गिर गया, जो अब तक का ऑल-टाइम लो है। इससे पहले रुपया 92.89 के स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन बाजार खुलते ही दबाव इतना बढ़ा कि यह सीधे 93 के पार निकल गया। यह गिरावट न केवल निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता पर भी सवाल खड़े कर रही है।

गुड़ी पड़वा के बाद बाजार खुलते ही झटका

गुरुवार को गुड़ी पड़वा के कारण फॉरेक्स बाजार बंद था, लेकिन शुक्रवार को बाजार खुलते ही रुपये में तेज गिरावट देखने को मिली। एक्सपर्ट्स का मानना है कि एक दिन की छुट्टी के बाद ग्लोबल संकेतों का असर एक साथ दिखा, जिससे रुपये पर अचानक दबाव बढ़ गया। इस दौरान डॉलर की मजबूती और वैश्विक अनिश्चितता ने भारतीय मुद्रा को कमजोर कर दिया।

मिडिल ईस्ट तनाव: सबसे बड़ा ट्रिगर

रुपये की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है। ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड और कतर के LNG हब पर हुए हमलों ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर डर पैदा कर दिया है। ऐसे हालात में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर भागते हैं, जिससे डॉलर मजबूत होता है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी कमजोर पड़ती है।

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FIIs की बिकवाली: बाजार से निकल रहा विदेशी पैसा

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी रुपये पर भारी पड़ रही है। पिछले 12 कारोबारी दिनों में FIIs ने करीब ₹74,000 करोड़ के शेयर बेच दिए हैं। केवल गुरुवार को ही ₹7,558 करोड़ की निकासी दर्ज की गई। जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं, तो वे रुपये बेचकर डॉलर खरीदते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।

कच्चे तेल की कीमतों का दबाव

कच्चे तेल की कीमतें भी रुपये के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड $106 प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

RBI की भूमिका पर टिकी उम्मीदें

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बाजार में हस्तक्षेप नहीं करता, तो रुपये में और गिरावट आ सकती है। RBI आमतौर पर डॉलर बेचकर रुपये को सहारा देता है, लेकिन लगातार गिरावट की स्थिति में यह रणनीति कितनी प्रभावी होगी, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल बाजार की नजर RBI की अगली चाल पर टिकी हुई है।

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शेयर बाजार की तेजी बनी सहारा

हालांकि रुपये में गिरावट के बीच शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई है। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 960.67 अंक की तेजी के साथ 75,167.91 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 311.50 अंक चढ़कर 23,313.65 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बाजार की इस तेजी ने रुपये को और ज्यादा गिरने से कुछ हद तक रोक लिया, लेकिन यह राहत सीमित ही मानी जा रही है।

आगे क्या? विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों का साफ कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता और FIIs की बिकवाली नहीं रुकती, तब तक रुपये पर दबाव बना रहेगा। आने वाले दिनों में अगर वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो रुपया और कमजोर हो सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और बाजार के संकेतों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

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