March 29, 2026
PM Modi का रूस दौरा

PM Modi का रूस दौरा | Image - X/@ANI

India Russia Ties: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2026 में रूस का दौरा करेंगे, जिससे भारत-रूस द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई है।

PM Modi Russia Visit 2026: रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मास्को में आयोजित “India and Russia: Towards a New Bilateral Agenda” सम्मेलन में घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2026 में रूस का दौरा करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य भारत-रूस के द्विपक्षीय संबंधों को और गहराई देना है। लावरोव ने कहा कि यह यात्रा विशेष रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को मजबूत करेगी।

दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने पहले ही द्विपक्षीय रिश्तों को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में कदम बढ़ाया था। अब PM Modi की रूस यात्रा से इन प्रयासों को और गति मिलने की उम्मीद है।

सम्मेलन में विदेश मंत्रियों ने साझा की रणनीतिक प्राथमिकताएं

रूसी इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल और भारत के मास्को स्थित दूतावास द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सम्मेलन को वीडियो माध्यम से दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने संबोधित किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-रूस की विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग न केवल दोनों देशों के हित में है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और विकास में भी योगदान देता है।

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लावरोव ने अपने विस्तृत भाषण में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को समय की कसौटी पर खरा उतरने वाला बताया और इसे बराबरी, पारस्परिक विश्वास, सम्मान और साझा हितों पर आधारित करार दिया।

आर्थिक सहयोग में बढ़ोतरी: राष्ट्रीय मुद्राओं में कारोबार

लावरोव ने यह भी बताया कि अब भारत और रूस के बीच व्यापार का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा राष्ट्रीय मुद्राओं यानी रुपये और रूबल में हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के समय दोनों देशों की आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूत करता है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा परियोजनाओं (जैसे कुडनकुलम प्रोजेक्ट), स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और कुशल पेशेवरों की गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में सहयोग की भूमिका को भी रेखांकित किया।

विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी पर जोर

लावरोव ने भारत को “21वीं सदी की महान शक्ति” और “एक अलग सभ्यता” करार दिया। उन्होंने कहा कि रूस के लिए भारत के साथ विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी बिना शर्त विदेश नीति प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिका और इज़राइल द्वारा उकसाए गए सैन्य-राजनीतिक संकट के बीच भारत-रूस संबंध पहले से अधिक प्रासंगिक और आवश्यक हो गए हैं।

जयशंकर ने अपने भाषण में संतुलित और संक्षिप्त रूप से दोनों देशों के सहयोग की दिशा और वैश्विक मंचों जैसे ब्रिक्स और एससीओ में साझेदारी का महत्व बताया।

ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग

हाल के हालात में भारत एक बार फिर रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीद रहा है। यह कदम न केवल ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत-रूस आर्थिक सहयोग की मजबूती का संकेत भी देता है। लावरोव ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय अस्थिरता के समय भारत और रूस के बीच सहयोग का महत्व और बढ़ गया है।

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दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता

सम्मेलन में यह स्पष्ट हुआ कि भारत और रूस दोनों ही देश द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने, व्यापार को बढ़ाने और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाई पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह दौरा केवल औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं होगा, बल्कि इसके जरिए दोनों देशों के साझा हितों और अंतरराष्ट्रीय मंचों में सहयोग को और व्यापक रूप मिलेगा।

द्विपक्षीय संबंधों की नई दिशा

PM Modi का रूस दौरा 2026 में द्विपक्षीय संबंधों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह यात्रा रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भारत-रूस सहयोग को और मजबूती देगी। लावरोव और जयशंकर दोनों के भाषणों से यह साफ हुआ कि दोनों देश वैश्विक अस्थिरता और क्षेत्रीय तनाव के बीच एक-दूसरे के भरोसे और सहयोग की रणनीति को बढ़ावा दे रहे हैं।

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