March 29, 2026
Mars की कक्षा में ESCAPADE मिशन के दो अंतरिक्ष यानों की कल्पनात्मक तस्वीर

NASA का ESCAPADE मिशन..

NASA ESCAPADE Mission: NASA का ESCAPADE Mission मंगल ग्रह (Mars) के खोए हुए वातावरण के रहस्य को समझने के लिए लॉन्च किया गया है। दो अंतरिक्ष यान मिलकर सौर हवाओं और मंगल के चुंबकीय वातावरण का अध्ययन करेंगे, जिससे वैज्ञानिकों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि Mars ने अरबों साल में अपना वातावरण कैसे खो दिया।

Mars Mission Secrets: आज Mars यानी मंगल ग्रह एक ठंडा, सूखा और बंजर दुनिया की तरह दिखाई देता है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों साल पहले इसकी तस्वीर बिल्कुल अलग थी। उस समय मंगल पर बहता हुआ पानी, घना वातावरण और अपेक्षाकृत गर्म जलवायु मौजूद थी। कई वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि उस दौर में Mars पर जीवन के अनुकूल परिस्थितियां भी हो सकती थीं। लेकिन समय के साथ यह ग्रह धीरे-धीरे बदलता गया और आज यह एक ठंडे रेगिस्तान जैसा दिखाई देता है।

Mars का वातावरण कैसे हुआ खत्म

वैज्ञानिकों के अनुसार मंगल के इस बड़े बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण सूर्य से निकलने वाली सौर हवाएं हैं। ये ऊर्जावान कण लगातार अंतरिक्ष में बहते रहते हैं और अरबों वर्षों में इन्होंने Mars के वातावरण को धीरे-धीरे खत्म कर दिया। जैसे-जैसे वातावरण पतला होता गया, ग्रह का तापमान भी कम होता गया। इसके कारण Mars की सतह पर मौजूद अधिकांश पानी या तो अंतरिक्ष में खो गया या फिर बर्फ में बदल गया।

ये भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट संकट से भारत में गैस की टेंशन, कमर्शियल सिलेंडर सीमित, PNG पर नए नियम लागू

NASA का ESCAPADE Mission क्या है

मंगल के इसी रहस्य को समझने के लिए NASA ने ESCAPADE (Escape and Plasma Acceleration and Dynamics Explorers) मिशन शुरू किया है। यह मिशन 13 नवंबर 2025 को लॉन्च किया गया था। फरवरी 2026 तक इसके सभी वैज्ञानिक उपकरण सक्रिय हो चुके हैं। यह मिशन यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि सौर हवाएं Mars के वातावरण और उसके चुंबकीय क्षेत्र के साथ किस तरह प्रतिक्रिया करती हैं। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि मंगल ने अपना अधिकांश वातावरण कैसे खो दिया।

Mars के लिए पहली बार दो अंतरिक्ष यान साथ

ESCAPADE मिशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दो अंतरिक्ष यान एक साथ Mars की कक्षा में काम करेंगे। किसी अन्य ग्रह के चारों ओर इस तरह दो यानों का समन्वित अध्ययन पहली बार किया जा रहा है। दोनों अंतरिक्ष यान अलग-अलग स्थानों से Mars के चुंबकीय वातावरण का अध्ययन करेंगे। इससे वैज्ञानिकों को ग्रह के आसपास हो रही प्रक्रियाओं की ज्यादा सटीक जानकारी मिल सकेगी।

“स्टीरियो व्यू” से समझेंगे Mars का वातावरण

दो अंतरिक्ष यानों के कारण वैज्ञानिकों को Mars के वातावरण और सौर हवाओं के प्रभाव का “स्टीरियो व्यू” मिलेगा। इसका मतलब है कि एक ही घटना को दो अलग-अलग स्थानों से एक साथ देखा जा सकेगा। इससे यह समझना आसान होगा कि जब सौर हवा Mars तक पहुंचती है तो वह ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र और वातावरण के साथ किस तरह प्रतिक्रिया करती है।

शुरुआती महीनों में एक ही कक्षा में उड़ान

जब दोनों अंतरिक्ष यान Mars तक पहुंचेंगे तो शुरुआती महीनों में वे एक ही कक्षा में यात्रा करेंगे। वे एक ही क्षेत्र के ऊपर थोड़े-थोड़े समय के अंतराल से गुजरेंगे। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि Mars के चुंबकीय वातावरण में कितनी तेजी से बदलाव होते हैं। कई बार ये बदलाव कुछ ही मिनटों में हो सकते हैं।

ये भी पढ़ें: गैस संकट से देशभर में हलचल, दिल्ली-मुंबई समेत बड़े शहरों में बढ़े सिलेंडर के दाम

बाद में अलग-अलग कक्षाओं में होगा अध्ययन

करीब छह महीने बाद दोनों अंतरिक्ष यान अलग-अलग कक्षाओं में चले जाएंगे। एक अंतरिक्ष यान Mars के ज्यादा करीब रहेगा जबकि दूसरा उससे थोड़ी दूरी पर रहेगा। इससे वैज्ञानिक एक साथ यह देख सकेंगे कि सौर हवा Mars तक कैसे पहुंचती है और फिर ग्रह का वातावरण उस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।

भविष्य के मानव मिशन के लिए अहम जानकारी

Mars पर इंसानों को भेजने की योजना लंबे समय से बनाई जा रही है। लेकिन वहां जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की तुलना में कहीं ज्यादा सौर विकिरण का सामना करना पड़ेगा। पृथ्वी को उसका मजबूत चुंबकीय क्षेत्र सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि Mars का चुंबकीय क्षेत्र काफी कमजोर हो चुका है। ऐसे में ESCAPADE मिशन से मिलने वाली जानकारी भविष्य के मानव मिशनों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

Mars का हाइब्रिड मैग्नेटोस्फियर

आज Mars पर केवल कुछ जगहों पर ही मजबूत चुंबकीय क्षेत्र मौजूद है। बाकी क्षेत्रों में सौर हवा और ऊपरी वातावरण के कण मिलकर एक अस्थायी चुंबकीय वातावरण बनाते हैं। वैज्ञानिक इसे “हाइब्रिड मैग्नेटोस्फियर” कहते हैं। यह व्यवस्था सौर कणों से बहुत ज्यादा सुरक्षा नहीं दे पाती, इसलिए Mars की सतह पर विकिरण का स्तर अधिक रहता है।

Mars के संचार सिस्टम को समझने में मदद

ESCAPADE मिशन Mars के आयनमंडल यानी ऊपरी वातावरण का भी अध्ययन करेगा। भविष्य में अगर Mars पर मानव मिशन भेजे जाते हैं तो संचार और नेविगेशन के लिए इसी क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि भविष्य में Mars पर GPS जैसी प्रणाली विकसित करनी है तो आयनमंडल को समझना बेहद जरूरी होगा।

ये भी पढ़ें: दिल्ली-NCR में बारिश, कई राज्यों में गरज-चमक और ओलावृष्टि की चेतावनी

Mars तक पहुंचने का अलग रास्ता

ESCAPADE मिशन Mars तक पहुंचने के लिए एक अलग रणनीति का इस्तेमाल कर रहा है। आमतौर पर Mars मिशन तब लॉन्च किए जाते हैं जब पृथ्वी और मंगल की कक्षाएं एक विशेष स्थिति में होती हैं, जो लगभग हर 26 महीने में आती है। लेकिन ESCAPADE पहले पृथ्वी से लगभग दस लाख मील दूर लैग्रेंज पॉइंट-2 के आसपास घूम रहा है। जब नवंबर 2026 में पृथ्वी और Mars फिर से सही स्थिति में आएंगे, तब यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की मदद से मंगल की ओर बढ़ेंगे।

2027 में Mars तक पहुंचने की उम्मीद

वैज्ञानिकों के अनुसार ESCAPADE मिशन के सितंबर 2027 में Mars तक पहुंचने की उम्मीद है। इस दौरान दोनों अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में सौर हवाओं और अंतरग्रहीय चुंबकीय परिस्थितियों का अध्ययन करते रहेंगे। ये वही परिस्थितियां हैं जिनसे होकर भविष्य में अंतरिक्ष यात्री Mars तक की यात्रा करेंगे। इस मिशन से मिलने वाली जानकारी न केवल मंगल के अतीत को समझने में मदद करेगी, बल्कि भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी बेहद अहम साबित हो सकती है।

खबर शेयर करें: