
NPS में 1 अप्रैल से लागू होंगे नए चार्ज नियम | Image Social Media
Pension Fund Fees Changes Update: पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के तहत नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। यह बदलाव खासतौर पर उस फीस से जुड़ा है जो निवेशकों से उनके फंड को मैनेज करने के बदले ली जाती है।
नए नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से यह फीस सभी निवेशकों के लिए समान नहीं रहेगी, बल्कि इसे अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसका सीधा असर NPS में निवेश करने वाले करोड़ों लोगों की जेब पर पड़ेगा।
सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के लिए अलग व्यवस्था
PFRDA ने कॉरपोरेट मॉडल के तहत आने वाली संस्थाओं को अब दो अलग-अलग वर्गों में बांट दिया है- सरकारी और गैर-सरकारी (प्राइवेट) संस्थाएं।
सरकारी संस्थाएं, यदि उनके पास आवश्यक संसाधन और सिस्टम मौजूद हैं, तो वे सीधे Central Recordkeeping Agency (CRA) से जुड़ सकती हैं। वहीं, प्राइवेट संस्थाओं को पहले की तरह नियोक्ता (Employer) और Point of Presence (PoP) के माध्यम से NPS का संचालन करना होगा।
इस बदलाव के कारण दोनों श्रेणियों के कर्मचारियों को मिलने वाली सेवाओं और शुल्क में अंतर देखने को मिल सकता है।
सेवाओं और खर्च पर क्या होगा असर?
नए नियम लागू होने के बाद कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाएं और उनसे लिए जाने वाले चार्ज उनके नियोक्ता की श्रेणी पर निर्भर करेंगे।
जहां सरकारी संस्थाओं को अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, वहीं प्राइवेट सेक्टर में PoP के माध्यम से सेवाएं जारी रहेंगी। इसका मतलब है कि प्राइवेट कर्मचारियों को कुछ अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।
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AUM आधारित नया PoP चार्ज लागू
गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए सबसे बड़ा बदलाव PoP चार्ज को लेकर किया गया है। अब यह चार्ज लेन-देन के आधार पर नहीं, बल्कि Assets Under Management (AUM) के आधार पर लिया जाएगा।
नए नियम के तहत सालाना 0.20% PoP चार्ज लगेगा, जो हर तिमाही (Quarterly) NAV के जरिए काटा जाएगा। इस पर GST भी अलग से लागू होगा।
उदाहरण के तौर पर
- यदि NPS में 10 लाख रुपये जमा हैं, तो लगभग 2,000 रुपये सालाना चार्ज लगेगा
- यदि 50 लाख रुपये जमा हैं, तो करीब 10,000 रुपये सालाना चार्ज लगेगा
यह बदलाव निवेशकों के कुल कॉर्पस से सीधे जुड़ा हुआ है, जिससे लंबे समय में रिटर्न पर असर पड़ सकता है।
सरकारी संस्थाओं के लिए PoP की भूमिका खत्म
नए नियमों के तहत, जिन सरकारी संस्थाओं के पास पर्याप्त व्यवस्था है, उन्हें अब Point of Presence (PoP) की जरूरत नहीं होगी।
वे सीधे CRA सिस्टम के जरिए NPS से जुड़े सभी कार्य कर सकेंगी
- नया खाता खोलना
- कर्मचारियों का योगदान जमा करना
- शिकायतों का निपटारा
- एग्जिट से जुड़े प्रोसेस
इससे सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रक्रिया आसान और सस्ती हो सकती है।
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e-NPS से खाता खोलने पर बड़ा फायदा

PFRDA ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो निवेशक e-NPS प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे ऑनलाइन खाता खोलते हैं, उन्हें PoP चार्ज नहीं देना होगा।
हालांकि, जिन लोगों ने अपना NPS खाता PoP के माध्यम से खुलवाया है, उनसे यह चार्ज लिया जाता रहेगा, चाहे वे बाद में ऑनलाइन ही योगदान क्यों न करें।
यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने और निवेशकों के लिए लागत कम करने की दिशा में उठाया गया है।
निवेशकों के लिए क्या है अहम सलाह?
इन बदलावों के बाद NPS निवेशकों को अपने खाते और शुल्क संरचना को ध्यान से समझना जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को यह जांचना चाहिए कि उनका खाता किस माध्यम से संचालित हो रहा है और उन पर कौन-कौन से चार्ज लागू हो रहे हैं।
लंबी अवधि के निवेश में छोटे-छोटे शुल्क भी बड़े अंतर का कारण बन सकते हैं, इसलिए सही जानकारी और योजना के साथ निवेश करना जरूरी है।

नगमा, एक प्रोफेशनल डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें लाइफस्टाइल, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं जैसे विषयों पर लिखने का 3 साल का अनुभव है। वर्तमान में वह Hind 24 के साथ जुड़ी हुई हैं।


