March 29, 2026
सूबेदार फिल्म में एक्शन अवतार में अनिल कपूर

फिल्म ‘सूबेदार’ में रिटायर्ड फौजी अर्जुन मौर्य के किरदार में अनिल कपूर (Photo Credit: Instagram)

Subedaar Review: अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज फिल्म सूबेदार में अनिल कपूर एक रिटायर्ड फौजी के दमदार किरदार में नजर आते हैं।

Subedaar Movie Review: ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई फिल्म ‘सूबेदार’ इन दिनों दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। बॉलीवुड के झकास स्टार अनिल कपूर एक बार फिर अपने दमदार अंदाज में नजर आए हैं। 70 साल की उम्र में भी उनकी फुर्ती और स्क्रीन प्रेजेंस देखने लायक है। वीकेंड पर अगर आप एक एक्शन और इमोशन से भरी फिल्म देखने की सोच रहे हैं, तो ‘सूबेदार’ आपके लिए एक दिलचस्प विकल्प बन सकती है।

अलग अंदाज में लौटे अनिल कपूर

फिल्म में अनिल कपूर ने अर्जुन मौर्य नाम के एक रिटायर्ड फौजी का किरदार निभाया है। यह किरदार गुस्सैल, सख्त और भीतर से टूटा हुआ इंसान है। सेना से रिटायर होने के बाद भी उसके भीतर का सैनिक अभी भी जिंदा है। फिल्म में उनका लुक मूंछें, सख्त चेहरा और हाथ में डंडा उन्हें बेहद प्रभावशाली बनाता है। कई जगहों पर उनका अंदाज दर्शकों को उनकी पुरानी फिल्म ‘नायक’ की याद दिलाता है।

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कहानी में फौजी का दर्द

फिल्म की कहानी अर्जुन मौर्य के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सेना से रिटायर होकर घर लौटता है लेकिन मानसिक रूप से अभी भी युद्ध की यादों में जी रहा है। उसे पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर यानी PTSD है। उसकी जिंदगी में सबसे बड़ा खालीपन उसके परिवार से दूरी का है। खासकर उसकी बेटी श्यामा के साथ उसका रिश्ता बेहद जटिल हो चुका है। श्यामा को लगता है कि उसके पिता ने हमेशा देश को परिवार से ज्यादा प्राथमिकता दी।

पिता-बेटी के रिश्ते की खटास

फिल्म में अर्जुन और उसकी बेटी श्यामा के बीच का रिश्ता भावनात्मक संघर्ष से भरा है। श्यामा अपने पिता से सवाल पूछती है और उन्हें उनकी जिम्मेदारियों की याद दिलाती है। राधिका मदान ने इस किरदार को मजबूती से निभाया है। वह किसी कमजोर किरदार की तरह नहीं बल्कि आत्मनिर्भर और बेबाक बेटी के रूप में सामने आती हैं। फिल्म में दोनों के बीच होने वाली नोकझोंक कई जगह कहानी को दिलचस्प बना देती है।

लाल जिप्सी और बदले की शुरुआत

अर्जुन मौर्य के जीवन में उसकी दिवंगत पत्नी की याद के रूप में एक लाल रंग की जिप्सी बची होती है। इस गाड़ी से उसका भावनात्मक लगाव है। कहानी तब मोड़ लेती है जब स्थानीय रेत माफिया प्रिंस उस जिप्सी को नुकसान पहुंचा देता है। यही घटना अर्जुन के भीतर छिपे गुस्से को बाहर ले आती है। इसके बाद फिल्म एक रिवेंज ड्रामा में बदल जाती है जहां अर्जुन अपने दुश्मनों से बदला लेने के लिए मैदान में उतरता है।

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खलनायक के रूप में आदित्य रावल

फिल्म में रेत माफिया प्रिंस के किरदार में आदित्य रावल ने दमदार अभिनय किया है। उनका किरदार घमंडी, हिंसक और सत्ता के नशे में चूर दिखाया गया है। उनकी एक्टिंग इतनी प्रभावी है कि दर्शकों के भीतर उनके प्रति नफरत पैदा हो जाती है। यही किसी भी मजबूत खलनायक की पहचान होती है। आदित्य रावल ने अपने किरदार को पूरी ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ निभाया है।

निर्देशन में नया प्रयोग

फिल्म का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने किया है, जो आमतौर पर भावनात्मक और संवेदनशील कहानियों के लिए जाने जाते हैं। ‘तुम्हारी सुलु’ और ‘जलसा’ जैसी फिल्मों के बाद उन्होंने इस बार एक्शन से भरपूर कहानी पर काम किया है। हालांकि फिल्म में कई जगह उनका मानवीय स्पर्श दिखता है, लेकिन एक्शन और भावनाओं के बीच संतुलन पूरी तरह नहीं बन पाया।

एक्शन और इमोशन का असंतुलन

फिल्म की शुरुआत काफी मजबूत और भावनात्मक है। दर्शक अर्जुन मौर्य के दर्द और अकेलेपन से जुड़ने लगते हैं। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, फिल्म अचानक तेज रफ्तार एक्शन ड्रामा में बदल जाती है। कई गंभीर मुद्दे जैसे भ्रष्टाचार और रेत माफिया का प्रभाव कहानी में उठाए तो गए हैं, लेकिन उन्हें गहराई से नहीं दिखाया गया।

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संगीत और बैकग्राउंड स्कोर

फिल्म में गानों की कमी महसूस होती है, लेकिन बैकग्राउंड स्कोर काफी प्रभावशाली है। एक्शन दृश्यों में संगीत रोमांच बढ़ाता है और इमोशनल सीन में अकेलेपन की भावना को मजबूत करता है। हालांकि फिल्म खत्म होने के बाद ऐसा कोई गाना नहीं है जो दर्शकों के मन में लंबे समय तक रह सके।

देखनी चाहिए या नहीं

अगर आप अनिल कपूर के फैन हैं या आपको देसी स्टाइल का रॉ एक्शन पसंद है, तो ‘सूबेदार’ एक बार जरूर देखी जा सकती है। फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष अनिल कपूर का अभिनय है। लेकिन कहानी का अंत थोड़ा जल्दबाजी में किया गया लगता है और कई मुद्दे अधूरे रह जाते हैं। कुल मिलाकर यह फिल्म एक वन टाइम वॉच रिवेंज थ्रिलर है जो मुख्य रूप से अनिल कपूर के दमदार अभिनय पर टिकी हुई है।

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