
गांवों में पढ़ाई और नौकरी की तैयारी में एआई बना युवाओं का सहारा | Image Source - Pexels
AI Usage in Rural India: देश के ग्रामीण इलाकों में युवाओं के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है। पढ़ाई से लेकर नौकरी की तैयारी और डिजिटल कामकाज तक, अब AI टूल्स गांवों के युवाओं के लिए एक अहम सहारा बनते जा रहे हैं।
हाल ही में सामने आई ‘यूथ एआई एस्पिरेशंस एंड एडॉप्शन रिपोर्ट’ के अनुसार, बड़ी संख्या में ग्रामीण युवा अपने रोजमर्रा के कामों में एआई की मदद ले रहे हैं। यह रिपोर्ट Head Held High Foundation की पहल JanAI के तहत तैयार की गई है, जिसमें कुल 3005 ग्रामीण युवाओं की भागीदारी रही।
55 प्रतिशत युवा रोजाना इस्तेमाल कर रहे AI टूल्स

सर्वे के मुताबिक ग्रामीण इलाकों के 55 प्रतिशत युवा लगभग हर दिन एआई का उपयोग करते हैं। वहीं 28 प्रतिशत युवा इसे कभी-कभार इस्तेमाल करते हैं, जबकि 17 प्रतिशत ऐसे भी हैं जो फिलहाल एआई से दूरी बनाए हुए हैं।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि तकनीक अब शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों में भी डिजिटल बदलाव की लहर तेजी से पहुंच रही है। मोबाइल इंटरनेट की उपलब्धता और आसान AI ऐप्स ने युवाओं को तकनीक से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है।
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भाषा की बाधा दूर कर रहा AI
ग्रामीण युवाओं के लिए भाषा एक बड़ी चुनौती रही है, खासकर अंग्रेजी समझने और लिखने में। रिपोर्ट के अनुसार, 40 प्रतिशत युवा ट्रांसलेशन के लिए एआई का सहारा ले रहे हैं। इससे उन्हें अंग्रेजी कंटेंट समझने, फॉर्म भरने और ऑनलाइन जानकारी हासिल करने में मदद मिल रही है। कई युवा बताते हैं कि एआई के जरिए अब वे ऑनलाइन कोर्स, सरकारी पोर्टल और जॉब वेबसाइट्स को बेहतर ढंग से समझ पा रहे हैं, जिससे उनके आत्मविश्वास में भी इजाफा हुआ है।
रिज्यूमे और असाइनमेंट में बन रहा डिजिटल साथी
करीब 33 प्रतिशत ग्रामीण युवा स्कूल असाइनमेंट, रिज्यूमे बनाने और ऑनलाइन आवेदन के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले जहां रिज्यूमे लिखने या आवेदन फॉर्म भरने में दिक्कत होती थी, अब एआई की मदद से युवा सही भाषा और फॉर्मेट में डॉक्यूमेंट तैयार कर पा रहे हैं। इससे नौकरी के अवसरों तक पहुंच आसान हो रही है और युवाओं को प्रतिस्पर्धी माहौल में खुद को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने का मौका मिल रहा है।
कमाई का जरिया बनने में अभी वक्त लगेगा

हालांकि एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल केवल 14 प्रतिशत ग्रामीण युवा ही इससे सीधे आय अर्जित कर पा रहे हैं। ज्यादातर युवा एआई को सीखने और तैयारी के माध्यम के रूप में देख रहे हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले समय में अगर एआई से जुड़े फ्रीलांस और डिजिटल रोजगार के अवसर गांवों तक पहुंचते हैं, तो यह तकनीक युवाओं के लिए स्थायी आय का मजबूत साधन बन सकती है।
सरकारी सर्टिफिकेशन कोर्स की बड़ी मांग
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ग्रामीण युवाओं में एआई कौशल को लेकर जबरदस्त उत्साह है। 90 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने कहा कि वे सरकार द्वारा प्रमाणित एआई कोर्स में दाखिला लेना चाहेंगे। वहीं 61 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि इस तरह की सर्टिफिकेशन से उनकी नौकरी की संभावनाएं बेहतर होंगी। इससे साफ है कि युवा अब सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल-बेस्ड एजुकेशन को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं।
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JanAI पहल से गांवों तक पहुंच रही AI शिक्षा
JanAI पहल के जरिए बीते एक साल में देश के 16 राज्यों के 50 जिलों में 75 हजार से ज्यादा युवाओं तक एआई से जुड़ी शिक्षा और प्रशिक्षण पहुंचाया गया है। स्थानीय प्रशासन और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से इस पहल को गांवों तक फैलाया जा रहा है। इस मिशन का लक्ष्य 2029 तक देश के 5 करोड़ नागरिकों को एआई साक्षर बनाना और 20 लाख छात्रों को एआई कौशल से लैस करना है।
ग्रामीण भारत में आत्मविश्वास और अवसरों की नई शुरुआत
रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण भारत के लिए एआई सिर्फ एक नई तकनीक नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और अवसरों का जरिया बनता जा रहा है। युवा बेहतर लिख पा रहे हैं, नई स्किल्स सीख रहे हैं और नौकरी के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि असली बदलाव तब आएगा, जब एआई केवल सीखने का माध्यम न रहकर गांवों में रोजगार और कमाई का स्थायी साधन बनेगा।

नगमा, एक प्रोफेशनल डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें लाइफस्टाइल, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं जैसे विषयों पर लिखने का 3 साल का अनुभव है। वर्तमान में वह Hind 24 के साथ जुड़ी हुई हैं।


