March 29, 2026
पापमोचनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करते श्रद्धालु

पापमोचनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत का महत्व | Image Social Media

Ekadashi 2026 Date: पापमोचनी एकादशी 2026 को लेकर भक्तों के बीच तारीख को लेकर भ्रम बना हुआ है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण एकादशी 14 मार्च से शुरू होकर 15 मार्च की सुबह तक रहेगी, लेकिन उदिया तिथि के आधार पर व्रत 15 मार्च को रखा जाएगा।

Papamochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी 2026 (Papamochani Ekadashi 2026) को लेकर इस बार श्रद्धालुओं के बीच तारीख को लेकर काफी भ्रम देखने को मिल रहा है। कई लोग 14 मार्च को व्रत रखने की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ पंचांगों में 15 मार्च का उल्लेख किया गया है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु इस दिन पूरे विधि-विधान से व्रत और पूजा करते हैं। ऐसे में सही तिथि और मुहूर्त जानना भक्तों के लिए बेहद आवश्यक हो जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार एकादशी की तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 मार्च 2026 को सुबह 8 बजकर 10 मिनट से शुरू होगी और 15 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। चूंकि व्रत और पूजा के लिए उदिया तिथि यानी सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि को अधिक महत्व दिया जाता है, इसलिए इस वर्ष पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च, रविवार को रखा जाएगा। इसी दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत का पालन करेंगे।

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पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व

पापमोचनी एकादशी (Papamochani Ekadashi 2026) हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और पापों से मुक्ति दिलाने वाली तिथि मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत करने से व्यक्ति के ज्ञात और अज्ञात पापों का नाश हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी कारण बड़ी संख्या में भक्त इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।

पापमोचनी एकादशी 2026 (Papamochani Ekadashi 2026) के शुभ मुहूर्त

धार्मिक कार्यों में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। पापमोचनी एकादशी 2026 के दिन पूजा और साधना के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 55 मिनट से 5 बजकर 43 मिनट तक रहेगा, जिसे आध्यात्मिक साधना और पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इन मुहूर्तों में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होने की मान्यता है।

व्रत और पूजा करने की पारंपरिक विधि

पापमोचनी एकादशी (Papamochani Ekadashi 2026) के दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने धूप, दीप, पुष्प और फल अर्पित किए जाते हैं। भगवान को तुलसी दल और मिठाई का भोग लगाना भी विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके साथ ही विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्र का जाप करने से पूजा का फल और अधिक बढ़ जाता है।

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दिनभर उपवास और भगवान विष्णु की आराधना

एकादशी के दिन भक्त पूरे दिन उपवास रखते हुए भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं। कई श्रद्धालु इस दिन केवल फलाहार ग्रहण करते हैं, जबकि कुछ लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं। दिनभर पूजा, भजन और मंत्र जाप के माध्यम से भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मन, वचन और कर्म से पवित्र रहना भी व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

द्वादशी के दिन किया जाता है व्रत का पारण

एकादशी व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी तिथि पर किया जाता है। द्वादशी के दिन सुबह भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। पारण के दौरान भगवान को भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है और तभी व्रत पूरा माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नियमपूर्वक व्रत और पारण करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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