March 31, 2026
महाशिवरात्रि 2026 पर शिवलिंग जलाभिषेक

Mahashivratri 2026: शिवभक्तों के लिए बड़ा दिन..

Mahashivratri News: महाशिवरात्रि 2026 पर चार प्रहर की पूजा और शिवलिंग जलाभिषेक के चार शुभ मुहूर्त बन रहे हैं।

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि 2026 देशभर में पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इसी कारण इस तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस दिन शिवभक्त उपवास रखते हैं, शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करते हैं और रात्रि जागरण कर भोलेनाथ की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से भक्तों को मानसिक शांति के साथ जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

तिथि और व्रत पारण का समय

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी 15 फरवरी शाम 05:04 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी शाम 05:34 बजे तक रहेगी। महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा, जबकि व्रत का पारण 16 फरवरी को सुबह 06:59 बजे से दोपहर 03:24 बजे के बीच किया जाएगा। धार्मिक दृष्टि से पारण का सही समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि तय मुहूर्त में पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

जलाभिषेक के चार शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए चार अलग-अलग शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।

  • पहला मुहूर्त: सुबह 08:24 से 09:48 बजे तक
  • दूसरा मुहूर्त: सुबह 09:48 से 11:11 बजे तक
  • तीसरा मुहूर्त: सुबह 11:11 से दोपहर 12:35 बजे तक
  • चौथा मुहूर्त: सुबह 06:11 से 07:47 बजे तक

मान्यता है कि इन चारों समयों में जलाभिषेक करने से अलग-अलग फल की प्राप्ति होती है। कोई भक्त स्वास्थ्य के लिए, कोई पारिवारिक सुख के लिए तो कोई करियर और आर्थिक उन्नति के लिए शिव का अभिषेक करता है।

चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व

महाशिवरात्रि की रात चार प्रहरों में पूजा का विशेष महत्व होता है।

  • पहला प्रहर: 15 फरवरी शाम 06:11 से रात 09:23 बजे तक
  • दूसरा प्रहर: रात 09:23 से 12:35 बजे तक
  • तीसरा प्रहर: 16 फरवरी रात 12:35 से सुबह 03:47 बजे तक
  • चौथा प्रहर: सुबह 03:47 से 06:59 बजे तक

चारों प्रहरों में पूजा करने से साधक को आध्यात्मिक बल मिलता है और मनोकामनाओं की पूर्ति की मान्यता है।

दस शुभ योगों का दुर्लभ संयोग

इस साल महाशिवरात्रि पर शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, साध्य, शुक्ल, ध्रुव, व्यतिपात और वरियान योग जैसे अनेक शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इतने सारे योगों का एक साथ बनना बेहद दुर्लभ होता है और ऐसे योगों में किया गया दान, जप और पूजा कई गुना फल प्रदान करती है।

चार प्रमुख राजयोगों का प्रभाव

महाशिवरात्रि पर कुंभ राशि में बुधादित्य, लक्ष्मी नारायण, शुक्रादित्य और शश महापुरुष जैसे प्रमुख राजयोग बन रहे हैं। इसके अलावा सूर्य, बुध, शुक्र और राहु की एक साथ स्थिति से चतुर्ग्रही योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग जीवन में नई शुरुआत, तरक्की और सौभाग्य का संकेत देता है।

पूजन सामग्री की पूरी सूची

महाशिवरात्रि की पूजा के लिए बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा, भांग, दीपक, आक का फूल, सफेद फूल, चंदन, रोली, सिक्का, अक्षत, सुपारी, कलश, लौंग-इलायची, जनेऊ, नारियल, मिठाई और फल की आवश्यकता होती है। इन सभी वस्तुओं को पहले से तैयार रखने से पूजा विधि सुचारु रूप से संपन्न होती है।

महाशिवरात्रि की विधिवत पूजा विधि

सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें। स्वच्छ स्थान पर चौकी पर कपड़ा बिछाकर शिव प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें। गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद बेलपत्र, फल-फूल अर्पित करें और आरती कर भोग लगाएं।

महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष हलाहल को भगवान शिव ने कंठ में धारण कर लिया था, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। देवताओं ने पूरी रात जागकर उनकी स्तुति की। मान्यता है कि इसी घटना की स्मृति में महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण किया जाता है और शिव आराधना से जीवन के संकट दूर होते हैं।

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