
ईरान संकट पर पीएम मोदी की हाई लेवल बैठक | Image - X/@narendramodi
Iran War Crisis News Today: पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक हाई लेवल बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें देश की ऊर्जा सुरक्षा और जरूरी आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति की गहन समीक्षा की गई। सरकार का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर आम जनता तक कम से कम पहुंचे।
ऊर्जा आपूर्ति पर सरकार की समीक्षा
बैठक में पेट्रोलियम, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक जैसे अहम क्षेत्रों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि देशभर में इन आवश्यक संसाधनों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। खासतौर पर ऊर्जा क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा को रोकने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक रणनीतियों पर विचार किया गया।
बिजली संकट से निपटने की तैयारी
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, देश के सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान हालात के बावजूद देश में बिजली संकट की संभावना बेहद कम है। इसके अलावा ऊर्जा उत्पादन और वितरण से जुड़े विभागों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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आयात स्रोतों में विविधता पर जोर
बैठक में यह भी तय किया गया कि रसायन, फार्मास्युटिकल और पेट्रोकेमिकल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के लिए जरूरी कच्चे माल के आयात स्रोतों को विविध बनाया जाएगा। सरकार नए देशों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने और निर्यात के नए बाजार तलाशने की दिशा में भी काम कर रही है, ताकि वैश्विक संकट का असर घरेलू उद्योगों पर कम पड़े।
प्रधानमंत्री मोदी के सख्त निर्देश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी मंत्रालय और विभाग मिलकर काम करें ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने मंत्रियों और सचिवों का एक विशेष समूह बनाने की बात कही, जो इस पूरे मामले की निगरानी करेगा। साथ ही राज्य सरकारों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी व जमाखोरी पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए।
होर्मुज संकट से बढ़ी गैस आपूर्ति की चिंता
इस युद्ध के चलते सबसे बड़ी चिंता प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर सामने आई है। भारत अपनी गैस जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है और अधिकांश आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होती है। वर्तमान तनाव के कारण इस मार्ग पर सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे शिपमेंट में देरी और आपूर्ति में कमी देखने को मिल रही है।
बाजार में दिखने लगा असर

जमीनी स्तर पर इस संकट का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। कई शहरों में गैस एजेंसियों और CNG स्टेशनों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग सिलेंडर भरवाने और ईंधन लेने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर पैनिक बाइंग और जमाखोरी की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है।
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तेल की कीमतें फिलहाल स्थिर
हालांकि 28 फरवरी से शुरू हुए इस संकट के बावजूद पेट्रोल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। केवल प्रीमियम तेल में करीब 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि कच्चे तेल की आपूर्ति अभी पर्याप्त है, लेकिन यदि स्थिति लंबी खिंचती है तो कीमतों पर असर पड़ सकता है।
भारत-ईरान वार्ता से उम्मीद
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति से भी बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और मुक्त व्यापार को लेकर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने खाड़ी क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा करते हुए इसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए बड़ा खतरा बताया।
वैश्विक संकट के बीच भारत की रणनीति
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि बदलते वैश्विक हालात के बावजूद भारत अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा, वैकल्पिक आयात स्रोत और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने जैसे उपायों पर तेजी से काम किया जा रहा है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जरूरतें सुरक्षित रह सकें।

दानियाल, एक अनुभवी मल्टीमीडिया पत्रकार हैं। Hind 24 की डिजिटल डेस्क पर सीनियर पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 6 वर्षों का अनुभव है। Hind 24 पर तेज और विश्वसनीय अपडेट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


