March 31, 2026
शीतला अष्टमी पर माता शीतला की पूजा करते श्रद्धालु

शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा का विशेष महत्व..

Sheetala Ashtami 2026: आज 11 मार्च 2026 को शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त माता शीतला की पूजा कर परिवार को रोगों और संक्रमण से बचाने की प्रार्थना करते हैं। जानें शीतला अष्टमी का पूजन मुहूर्त, बसोड़ा की परंपरा और इस पर्व का धार्मिक व स्वास्थ्य से जुड़ा महत्व।

Sheetala Ashtami 2026 Puja Muhurat: शीतला अष्टमी 2026 का पावन पर्व आज 11 मार्च को देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन माता शीतला की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन माता शीतला की पूजा करने से परिवार को विभिन्न रोगों और संक्रमण से रक्षा मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार यह पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। कई क्षेत्रों में इसे बसोड़ा या बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भक्त माता शीतला की पूजा कर उनसे परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। खासतौर पर बच्चों की अच्छी सेहत के लिए माता से विशेष प्रार्थना की जाती है।

बासी भोजन की परंपरा का धार्मिक महत्व

शीतला अष्टमी का पर्व अपनी अनोखी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। कई क्षेत्रों में इस दिन को बसोड़ा कहा जाता है क्योंकि इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता। परंपरा के अनुसार अष्टमी के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता और सप्तमी की रात को ही भोजन बनाकर रख लिया जाता है।

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अगले दिन यानी अष्टमी को वही ठंडा या बासी भोजन माता शीतला को भोग लगाया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में मीठे चावल, दही बड़े, रबड़ी, पूरी और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। माना जाता है कि ठंडा भोजन ग्रहण करने की यह परंपरा माता शीतला की आराधना से जुड़ी हुई है और इससे शरीर को शीतलता का संदेश भी मिलता है।

पूजा का सही समय जानना जरूरी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित प्रवीण मिश्र के अनुसार इस वर्ष शीतला अष्टमी की अष्टमी तिथि 11 मार्च को रात 1 बजकर 54 मिनट पर शुरू हो चुकी है और यह तिथि 12 मार्च को तड़के 4 बजकर 19 मिनट तक रहेगी।

इस दौरान पूरे दिन माता शीतला की पूजा की जा सकती है। पूजा का शुभ समय आज सुबह 6 बजकर 36 मिनट से शाम 6 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में भक्तजन घरों में या मंदिरों में माता शीतला की पूजा कर सकते हैं। पूजा के दौरान साफ-सफाई, शुद्धता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखने की परंपरा है।

शीतला अष्टमी का धार्मिक और स्वास्थ्य से जुड़ा महत्व

शीतला अष्टमी का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ा माना जाता है। ‘शीतला’ शब्द का अर्थ ही होता है ठंडक प्रदान करने वाली। मान्यता है कि माता शीतला की कृपा से शरीर को शीतलता और रोगों से राहत मिलती है। यह पर्व ऐसे समय में आता है जब मौसम धीरे-धीरे गर्म होने लगता है।

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इसलिए इस दिन माता शीतला से प्रार्थना की जाती है कि आने वाली गर्मी में लोगों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे और बीमारियों से बचाव हो। धार्मिक ग्रंथों में भी माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में वर्णित किया गया है।

संक्रमण से सुरक्षा की प्राचीन मान्यता

पुराने समय में चेचक और अन्य संक्रमणजनित बीमारियां काफी तेजी से फैलती थीं। उस दौर में चिकित्सा सुविधाएं सीमित होने के कारण लोग धार्मिक आस्था के माध्यम से भी रोगों से सुरक्षा की प्रार्थना करते थे। शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा कर उनसे विशेष रूप से त्वचा से जुड़ी बीमारियों और संक्रमण से रक्षा की कामना की जाती थी।

खासकर बच्चों को इन रोगों से ज्यादा खतरा रहता था, इसलिए माता से उनके स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए प्रार्थना की जाती थी। आज भी कई परिवार इस परंपरा को श्रद्धा के साथ निभाते हैं और इसे स्वास्थ्य और स्वच्छता के संदेश से जोड़कर देखते हैं।

औषधीय गुणों से जुड़ी मान्यता

शीतला अष्टमी के दिन कई स्थानों पर नीम के पेड़ की पूजा करने की भी परंपरा है। नीम को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है और इसे माता शीतला का प्रिय वृक्ष माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नीम की पत्तियां आसपास रखने से वातावरण शुद्ध रहता है और कई प्रकार के संक्रमण से बचाव होता है।

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पुराने समय में लोग नीम की पत्तियां या टहनियां अपने बिस्तर के पास रखते थे ताकि बीमारियों से रक्षा हो सके। इस प्रकार शीतला अष्टमी का पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्वच्छता, स्वास्थ्य और प्राकृतिक उपचार के महत्व का भी संदेश देता है।

धार्मिक परंपरा में छिपा जीवन का महत्वपूर्ण संदेश

शीतला अष्टमी का व्रत केवल पूजा और परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वच्छता और स्वास्थ्य के महत्व को भी दर्शाता है। इस दिन लोग अपने घरों और पूजा स्थलों की विशेष रूप से सफाई करते हैं और शुद्धता बनाए रखते हैं। माता शीतला की पूजा करते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

इस पर्व के माध्यम से यह संदेश भी मिलता है कि साफ-सफाई और संतुलित जीवनशैली से ही बीमारियों से बचाव संभव है। इसी कारण से शीतला अष्टमी को आस्था, स्वास्थ्य और परंपरा का अद्भुत संगम माना जाता है।

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