March 29, 2026
भारत में एलपीजी गैस सप्लाई पर पीएम मोदी की समीक्षा बैठक

मिडिल ईस्ट संकट के बीच पीएम मोदी ने एलपीजी और गैस सप्लाई की समीक्षा की (Image - PTI)

LPG Gas Supply: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच भारत में LPG Gas Supply को लेकर सरकार अलर्ट हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में स्पष्ट किया कि देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है।

LPG Gas Supply Crisis: पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट की आशंका पैदा कर दी है। कई देशों में गैस और तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। खासतौर पर एलपीजी की सप्लाई को लेकर वैश्विक बाजार में अस्थिरता देखने को मिल रही है। हालांकि भारत में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और सरकार ने साफ कहा है कि देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद संभावित संकट को देखते हुए सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है।

कैबिनेट बैठक में PM मोदी ने दिए सख्त निर्देश

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक हुई, जिसमें ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिया कि मिडिल ईस्ट संकट का असर भारत में एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की सप्लाई पर बिल्कुल नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में पर्याप्त भंडार मौजूद है और लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन सरकार को हर संभावित स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।

पेट्रोलियम मंत्री ने बताया भारत की स्थिति मजबूत

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी साफ किया कि भारत की ऊर्जा स्थिति फिलहाल मजबूत और सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि एलएनजी और अन्य ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति लगातार जारी है और कई देशों के साथ दीर्घकालिक समझौते होने के कारण भारत को किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। कतर समेत अन्य देशों से गैस की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है।

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होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता

भारत के अधिकांश तेल और गैस आयात का रास्ता होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इस मार्ग को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। यही कारण है कि भारत सरकार ने वैकल्पिक सप्लाई रूट्स और नए आयात स्रोतों पर भी तेजी से काम शुरू कर दिया है ताकि किसी भी बाधा की स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।

Essential Commodities Act के तहत जारी हुआ नया आदेश

सरकार ने एलपीजी सप्लाई को नियंत्रित और सुरक्षित रखने के लिए Essential Commodities Act 1955 के तहत नया आदेश जारी किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने Natural Gas Supply Regulation Order 2026 को नोटिफाई किया है। इस आदेश के तहत घरेलू उपयोग के लिए गैस सप्लाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का फैसला किया गया है ताकि घरों में रसोई गैस की उपलब्धता बनी रहे।

पहले घरेलू सिलेंडर, बाद में कमर्शियल सप्लाई

सरकार के नए नियम के अनुसार एलपीजी की सप्लाई में पहले घरेलू गैस सिलेंडर को प्राथमिकता दी जाएगी और उसके बाद कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति होगी। इस फैसले के बाद होटल, रेस्टोरेंट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में थोड़ी चिंता देखी जा रही है, क्योंकि उनकी गैस सप्लाई में देरी हो सकती है। हालांकि सरकार का कहना है कि जरूरी संस्थानों को पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

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LPG उत्पादन बढ़ाने के दिए गए निर्देश

मिडिल ईस्ट से एलएनजी शिपमेंट में संभावित बाधा को देखते हुए सरकार ने तेल कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फैसले के बाद एलपीजी उत्पादन में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि अगर युद्ध लंबा चलता है तो भी भारत को गैस संकट का सामना न करना पड़े।

गैस बुकिंग के नियमों में भी हुआ बदलाव

जमाखोरी और काला बाजारी को रोकने के लिए सरकार ने एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। अब एक उपभोक्ता को नया सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना होगा। इससे अनावश्यक बुकिंग और जमाखोरी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

अस्पताल और शिक्षा संस्थानों को मिलेगी प्राथमिकता

सरकार ने एक विशेष समिति का गठन किया है जो गैर-घरेलू एलपीजी सप्लाई की निगरानी करेगी। यह समिति अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य आवश्यक सेवाओं को गैस की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करेगी। साथ ही होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों में गैस उपयोग की भी समीक्षा की जाएगी।

तेल और गैस के नए आयात स्रोत तलाश रहा भारत

ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत अब 40 से ज्यादा देशों से तेल और गैस आयात के विकल्प तैयार कर रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम की जाए और भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर न पड़े।

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भारत के पास 8 हफ्ते का तेल भंडार

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का करीब 85 से 90 प्रतिशत तेल विदेशों से आयात करता है। फिलहाल भारत के पास लगभग आठ हफ्तों का रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है, जो किसी भी आपात स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।

कच्चे तेल की कीमतों में आई राहत

वैश्विक तनाव के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में गिरावट देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से गिरकर करीब 90 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है। इससे भारत को आयात बिल और महंगाई के मोर्चे पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

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