
मार्च में ही आगरा में 37 डिग्री पार पहुंचा तापमान | Image Social Media
UP Weather March Heatwave Alert: उत्तर प्रदेश में इस साल गर्मी ने तय समय से पहले ही अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। मार्च के पहले ही सप्ताह में तापमान जिस तेजी से बढ़ा है, उसने मौसम वैज्ञानिकों और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। ताजनगरी आगरा में अधिकतम तापमान 37.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस महीने के सामान्य तापमान से काफी ज्यादा है।
आमतौर पर मार्च में यहां का औसत तापमान 32 से 33 डिग्री के आसपास रहता है, लेकिन इस बार पारा तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। तेज धूप और तपती हवाओं ने लोगों को अभी से मई-जून जैसी गर्मी का एहसास कराना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
सामान्य से कई डिग्री ज्यादा दर्ज हुआ तापमान
रविवार को आगरा में अधिकतम तापमान 37.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से काफी अधिक माना जा रहा है। वहीं न्यूनतम तापमान भी 17.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से करीब 3.4 डिग्री ज्यादा है। इसका असर यह हुआ कि दिन के साथ-साथ रात में भी गर्मी का एहसास होने लगा है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जब दिन और रात दोनों के तापमान सामान्य से अधिक होते हैं तो गर्मी का असर ज्यादा महसूस होता है। इसके अलावा आर्द्रता का स्तर 78 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे वातावरण में नमी की स्थिति भी बदल रही है। तेज धूप के कारण लोगों को त्वचा पर जलन और थकान जैसे लक्षण महसूस होने लगे हैं।
स्वास्थ्य पर पड़ सकता है सीधा और गंभीर असर
मार्च में इतनी तेज गर्मी का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। डॉक्टरों के अनुसार जब मौसम अचानक गर्म हो जाता है तो शरीर को उसके अनुरूप ढलने में समय लगता है। इस वजह से डिहाइड्रेशन, थकान और कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। तापमान लगातार बढ़ने पर हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है।
बुजुर्गों, छोटे बच्चों और खुले में काम करने वाले मजदूरों के लिए यह मौसम ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यूवी इंडेक्स भी 6 से 7 तक पहुंच सकता है, जो त्वचा के लिए नुकसानदायक माना जाता है। इसलिए लोगों को दोपहर के समय धूप में निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी जा रही है।
बिजली और पानी की बढ़ेगी भारी मांग
तेज गर्मी के कारण लोगों ने अभी से कूलर, पंखे और एयर कंडीशनर चलाने शुरू कर दिए हैं। इसका सीधा असर बिजली की खपत पर पड़ रहा है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले महीनों में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही पानी की खपत भी तेजी से बढ़ने की संभावना है।
गर्मी के कारण लोगों को ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है और शहरों में जल आपूर्ति पर दबाव बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर गर्मी का यह दौर लंबा चला तो कई इलाकों में पानी की किल्लत भी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा बिजली बिल बढ़ने से आम लोगों की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
इस बार ज्यादा दिन तक चल सकती है लू
उत्तर भारत में आम तौर पर भीषण गर्मी और लू का दौर अप्रैल के आखिर या मई में शुरू होता है। लेकिन इस साल तापमान में अचानक आई तेजी ने संकेत दे दिए हैं कि लू का मौसम जल्दी शुरू हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार हीटवेव के दिन सामान्य से ज्यादा हो सकते हैं।
सामान्य परिस्थितियों में पांच से छह दिन तक लू चलती है, लेकिन इस साल यह अवधि 10 से 12 दिन तक भी पहुंच सकती है। अगर ऐसा हुआ तो लोगों के लिए दिन के समय बाहर निकलना काफी मुश्किल और खतरनाक हो सकता है। इसलिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी गर्मी से बचाव के लिए लोगों को लगातार जागरूक करने की तैयारी में जुटे हैं।
गेहूं की फसल पर पड़ सकता है बड़ा असर
समय से पहले आई गर्मी का असर सिर्फ लोगों की दिनचर्या पर ही नहीं बल्कि खेती पर भी पड़ सकता है। इस समय गेहूं जैसी रबी की फसल में दाने भरने की प्रक्रिया चलती है, जो उत्पादन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण चरण होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस समय तापमान ज्यादा बढ़ जाता है तो दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते।
इससे दानों की मोटाई कम रह जाती है और उत्पादन घट सकता है। जल्दी पकने के कारण फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगर उत्पादन कम हुआ तो बाजार में गेहूं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है और आम लोगों को महंगा अनाज खरीदना पड़ सकता है।

अजय सिंह, पिछले 4 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अनुभव रखते हैं। राजनीति, खेल, बिजनेस और नेशनल न्यूज़ पर खास पकड़ है। फिलहाल Hind 24 के लिए कार्यरत हैं।


