
दिल्ली में रंगों के त्योहार होली पर गुलाल उड़ाते और जश्न मनाते लोग। (Image - PTI)
Holi 2026 Celebrations: देश की राजधानी दिल्ली में आज होली का त्योहार अपनी पूरी भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। अमूमन होली जिस तिथि को मनाई जाती है, इस बार चंद्रग्रहण की विशेष स्थिति के कारण मुख्य रंगोत्सव यानी दुलंडी एक दिन बाद यानी आज बुधवार, 4 मार्च 2026 को मनाई जा रही है।
मंगलवार को सूतक और ग्रहण के प्रभाव के कारण लोगों ने संयम बरता, लेकिन आज सुबह होते ही छतों से लेकर सड़कों तक केवल रंगों की फुहारें नजर आ रही हैं। दिल्ली के बाजारों में कल देर रात तक तिल धरने की जगह नहीं थी; लोग सफेद कुर्ते, रंग-बिरंगी पिचकारियां और जैविक गुलाल खरीदते दिखे। सोसाइटियों ने इस बार विशेष इंतजाम किए हैं, जहां रेन डांस और डीजे की धुन पर लोग थिरकते नजर आ रहे हैं।
सुरक्षा के कड़े पहरे में दिल्ली की गलियां

त्योहार के उत्साह के बीच किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। संवेदनशील इलाकों, विशेषकर मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों (Drunk Driving) के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है।
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प्रमुख चौराहों पर बैरिकेडिंग की गई है और सीसीटीवी कैमरों व ड्रोन्स के जरिए भीड़भाड़ वाले इलाकों की निगरानी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट निर्देश है कि त्योहार मनाएं, लेकिन दूसरों की सुविधा और सुरक्षा का ध्यान रखें। मुख्य मार्गों पर यातायात को सुचारू रखने के लिए विशेष डायवर्जन प्लान भी लागू किया गया है।
दिल्ली में शराब की दुकानें खुली, नहीं रहेगा ‘ड्राई डे’
इस वर्ष दिल्ली में होली के अवसर पर शराब के शौकीनों के लिए राहत की खबर है। दिल्ली सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अवकाश और ड्राई डे की सूची में इस बार होली (दुलंडी) को शामिल नहीं किया गया है।
हालांकि गणतंत्र दिवस और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर दुकानें बंद रहीं, लेकिन आज शराब के ठेके अपने निर्धारित समय पर खुले रहेंगे। आबकारी विभाग के इस फैसले से जहां एक तरफ राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद है, वहीं पुलिस के लिए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी ताकि नशे की हालत में कोई हुड़दंग न हो।
मथुरा-अयोध्या में आस्था के रंगों से सराबोर हुए लाखों श्रद्धालु

उत्तर प्रदेश में होली का स्वरूप भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम पेश कर रहा है। कान्हा की नगरी मथुरा और वृंदावन में ‘लठमार होली’ और ‘फूलों की होली’ के बाद आज मुख्य रंगोत्सव मनाया जा रहा है।
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बांके बिहारी मंदिर के पट खुलते ही भक्तों पर अबीर की वर्षा शुरू हो गई। वहीं, रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद यह होली और भी खास हो गई है। रामलला के दरबार में गुलाल अर्पित कर श्रद्धालुओं ने उत्सव की शुरुआत की। पूरे प्रदेश में ‘होली आई रे’ के गीतों और ढोल-नगाड़ों की थाप ने फिजा में एक अलग ही ऊर्जा भर दी है।
काशी में बाबा विश्वनाथ के साथ मसान से मंदिर तक होली
वाराणसी यानी काशी में होली का अंदाज सबसे निराला है। रंगभरी एकादशी से शुरू हुआ उत्सव आज अपने चरमोत्कर्ष पर है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में आज सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। यहाँ पारंपरिक रूप से टेसू (पलाश) के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जा रहा है।
मैदागिन से लेकर अस्सी घाट तक युवाओं की टोलियां ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के साथ एक-दूसरे को रंग रही हैं। काशी की प्रसिद्ध ‘होली बारात’ निकाली जा रही है, जिसमें लोग भगवान शिव के अड़भंगी स्वरूप धारण कर ऊंटों और घोड़ों पर सवार होकर निकल रहे हैं। भांग की ठंडई और मलइयो के स्वाद ने उत्सव को और भी जायकेदार बना दिया है।
शाहजहांपुर की अनूठी परंपरा: लाट साहब का जुलूस

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में होली का एक बेहद अनोखा और प्राचीन रंग देखने को मिल रहा है। यहाँ ‘बड़े लाट साहब’ और ‘छोटे लाट साहब’ का जुलूस निकाला जा रहा है। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच, लाट साहब को भैंसागाड़ी पर सवार कर पूरे शहर में घुमाया जा रहा है।
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परंपरा के अनुसार, इस जुलूस में लाट साहब का स्वागत प्रतीकात्मक रूप से जूते-चप्पलों और झाड़ू से किया जाता है। चौक कोतवाली पहुंचने पर उन्हें सलामी दी जाती है। प्रशासन ने इस संवेदनशील आयोजन को देखते हुए भारी मात्रा में पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात किए हैं ताकि परंपरा भी बनी रहे और शांति भी।
रिश्तों को नया रंग देने का पर्व
होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक है। दिल्ली के आधुनिक अपार्टमेंट्स से लेकर यूपी के गांवों की पगडंडियों तक, हर जगह लोग अपनी रोजमर्रा की भागदौड़ भूलकर खुशियों में डूबे हैं।
बच्चों के लिए जहाँ यह पिचकारी और गुब्बारों का खेल है, वहीं बुजुर्गों के लिए यह पुराने रिश्तों की कड़वाहट मिटाकर गले मिलने का अवसर है। आज पूरा उत्तर भारत रंगों के एक ऐसे सूत्र में बंधा है, जहाँ न कोई छोटा है न बड़ा, बस हर तरफ उल्लास, उमंग और प्रेम का रंग है।

अजय सिंह, पिछले 4 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अनुभव रखते हैं। राजनीति, खेल, बिजनेस और नेशनल न्यूज़ पर खास पकड़ है। फिलहाल Hind 24 के लिए कार्यरत हैं।


